Bihar Education System: अब बिहार में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी। राज्य सरकार ने एक नई पहल की है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के छात्र बिना किसी महंगी कोचिंग के ही JEE और NEET जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाएंगे। यह व्यवस्था उन मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है, जो आर्थिक चुनौतियों के कारण निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते थे।
सरकारी स्कूलों में मुफ्त JEE-NEET कोचिंग की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया है। हाल ही में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में, मुख्यमंत्री ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। इसका मकसद उन प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते।’
सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों से निकले छात्र भी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए छात्रों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित न रखकर, सही मार्गदर्शन और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के 24×7 इंटरैक्टिव डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म को भी और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण स्टडी मैटेरियल और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन डिजिटल माध्यम से घर बैठे मिल सकेगा। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि यह उन्हें आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच प्रदान करेगी।
केवल परीक्षा नहीं, सर्वांगीण विकास पर जोर
सरकार की यह पहल केवल बोर्ड परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री के निर्देशों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार स्कूली शिक्षा को राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक मजबूत नींव बनाना चाहती है। यदि यह ब्लूप्रिंट धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह बिहार के उन लाखों छात्रों के लिए स्वर्णिम अवसर पैदा करेगा, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन सही दिशा और संसाधनों का अभाव था। यह कदम राज्य के शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।






