Bihar Student Protest: बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग में चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज होने के संकेत दे रहा है। छात्र युवा संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की है, जो 25 अगस्त को किया जाएगा। संगठन का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली समेत विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 17 दिनों से आमरण अनशन जारी है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
इसी अनदेखी के कारण छात्रों ने अपनी आवाज सीधे सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। इस बड़े प्रदर्शन के लिए पूरे बिहार से छात्रों को पटना बुलाया जा रहा है, जिससे आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना है।
आमरण अनशन और सरकार की अनदेखी
छात्र युवा संघर्ष मोर्चा के अनुसार, गर्दनीबाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी 17वें दिन भी आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लगातार धरना-प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार उनकी मांगों पर गंभीर नहीं है। सरकार की उदासीनता को देखते हुए अब छात्र संगठनों ने अपने इस बिहार स्टूडेंट प्रोटेस्ट को सड़क से मुख्यमंत्री आवास तक ले जाने का फैसला किया है।
25 अगस्त को एकजुट होंगे बिहार के छात्र
छात्र युवा संघर्ष मोर्चा ने 25 अगस्त के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। संगठन ने ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री आवास के घेराव में बिहार के अलग-अलग जिलों से छात्र शामिल होंगे। इस फैसले के बाद गर्दनीबाग में केंद्रित आंदोलन अब प्रदेशव्यापी स्वरूप लेने की ओर बढ़ रहा है। संगठन की योजना है कि अधिक से अधिक छात्रों को पटना में एकत्रित कर अपनी मांगों को मजबूती से रखा जाए।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की भी प्रमुख मांग
असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के अलावा, छात्र युवा संघर्ष मोर्चा ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है। छात्रों का कहना है कि परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियाँ उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं। वे एक ऐसी परीक्षा प्रणाली चाहते हैं, जिसमें पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता हो। आंदोलनकारियों के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सीधा असर छात्रों के करियर पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
छात्र संगठन का आरोप है कि इतने लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। जब 17 दिनों के आमरण अनशन के बाद भी बातचीत या समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, तभी मुख्यमंत्री आवास के घेराव जैसा बड़ा कदम उठाने का फैसला लिया गया। यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी तीव्र हो सकता है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा।






