Bihar Student Protest: पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर लंबित भर्ती परीक्षाओं और अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन में अब अंदरूनी मतभेद सामने आ गए हैं। शनिवार को इस आंदोलन के बीच रौशन आनंद, विपिन सर के साथ अनशन पर बैठे छात्रों से मिलने पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों और छात्र नेताओं से एकजुट होने की अपील की, लेकिन छात्र नेता दिलीप ने एक मंच पर आने से इनकार कर दिया। इसके बाद रौशन आनंद ने एक बड़ा दावा करते हुए चेतावनी दी कि अगर छात्र नेता एक नहीं हुए तो वह खुद आंदोलन का नेतृत्व करेंगे और आयोग का ‘काला चिट्ठा’ सार्वजनिक करेंगे।
BPSC-BSSC के ‘काले राज’ खुलेंगे? पटना छात्र आंदोलन में रौशन आनंद का बड़ा दावा!
बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पटना के गर्दनीबाग में चल रहे छात्र आंदोलन में अब एक नया मोड़ आ गया है। छात्र नेता रौशन आनंद ने शनिवार को धरना स्थल पर पहुंचकर न केवल छात्रों से एकजुट होने की अपील की, बल्कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) से जुड़े ‘काले राज’ खोलने का भी दावा किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्र संगठन एक मंच पर नहीं आए, तो वह खुद इस आंदोलन की अगुवाई करेंगे।
BPSC-BSSC के ‘राज’ खोलने का रौशन आनंद का दावा
छात्र नेता रौशन आनंद एक फाइल लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और दावा किया कि इसमें आयोग से जुड़ी अहम जानकारी है। उन्होंने कहा कि वह इस जानकारी को तुरंत सार्वजनिक नहीं करेंगे। आनंद ने शर्त रखी कि यदि सभी प्रदर्शनकारी छात्र संगठन एक साझा मंच बनाते हैं, तभी वह इन ‘काले राज’ को उजागर करेंगे। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। रौशन आनंद ने आंदोलन को और तेज करने का संकेत देते हुए BPSC और BSSC कार्यालयों का घेराव करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि यदि छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जाएगा। फिलहाल, इस घेराव के लिए किसी निश्चित कार्यक्रम या तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
छात्र नेताओं में एकजुटता पर मतभेद
अपनी यात्रा के दौरान रौशन आनंद ने छात्र नेता दिलीप से भी मुलाकात की। उनका उद्देश्य दिलीप के समूह को एक साझा मंच पर लाना था, ताकि आंदोलन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। हालांकि, आनंद के अनुसार, यह बातचीत किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाई। दिलीप की ओर से इस प्रस्तावित एकजुटता पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान नहीं आया है, जिससे विभिन्न छात्र समूहों के बीच जारी मतभेद सामने आते हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
गर्दनीबाग में चल रहे इस आंदोलन में छात्रों ने कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। ये मांगें सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित हैं:
- TRE-4 की अधिसूचना जारी करना।
- परीक्षा प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाना।
- एकल परीक्षा प्रणाली लागू करना।
- नकारात्मक अंकन (Negative Marking) को हटाना।
- BSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान।
अगस्त के मध्य से ही छात्रों का यह आंदोलन भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षा नीतियों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने आंदोलन के नेतृत्व और एकजुटता के सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है। आंदोलन की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या विभिन्न छात्र समूह एक साझा मंच और भविष्य की रणनीति पर सहमत हो पाते हैं।
छात्र नेता दिलीप से अपील और इनकार: क्या है वजह?
रौशन आनंद ने गर्दनीबाग पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों से कहा कि सभी को एक मंच पर आना चाहिए और दो गुटों में नहीं बंटना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि छात्र और छात्र नेता एक साथ आवाज उठाएंगे, तभी उनकी मांग मजबूती से सरकार तक पहुंचेगी। उन्होंने छात्र नेता दिलीप से भी बातचीत की और उन्हें एक मंच पर आने के लिए ‘हाथ जोड़ने और पैर पकड़ने’ तक की बात कही। हालांकि, दिलीप ने रौशन आनंद के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया। इस इनकार के बाद आंदोलन के भीतर अलग-अलग मंचों को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
दिलीप के नेतृत्व में चल रहा छात्र आंदोलन मुख्य रूप से BPSC TRE-4 के नोटिफिकेशन, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर है। आंदोलनकारियों ने एकल परीक्षा प्रणाली, नकारात्मक अंकन समाप्त करने तथा BSSC और दरोगा भर्ती में पारदर्शिता समेत कई मांगें उठायी हैं। हालांकि, दिलीप ने रौशन आनंद के साथ एक मंच पर आने से इनकार क्यों किया, इसकी स्पष्ट वजह का कोई आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है।
‘आयोग का पूरा काला चिट्ठा है मेरे पास’, रौशन आनंद का बड़ा दावा
रौशन आनंद ने धरना स्थल पर हाथ में एक फाइल दिखाते हुए दावा किया कि इसमें आयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी यानी ‘काला चिट्ठा’ है। उन्होंने कहा कि वह इस फाइल को शनिवार को सार्वजनिक करने वाले थे, लेकिन अब ऐसा नहीं करेंगे। आनंद ने साफ शब्दों में कहा,
“जब तक सभी छात्र और छात्र नेता एक मंच पर नहीं आते, तब तक वह फाइल सार्वजनिक नहीं करेंगे और दोबारा गर्दनीबाग नहीं आएंगे।”
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर छात्र नेता एकजुट नहीं हुए तो वह खुद छात्रों का नेतृत्व करेंगे और उनके मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
BPSC-BSSC घेराव की तैयारी, आंदोलन की अगली दिशा
रौशन आनंद ने अपनी बात रखते हुए BPSC और BSSC के घेराव की भी बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों की मांगों को लेकर आगे आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। गर्दनीबाग में छात्र आंदोलन 18 अगस्त से लगातार तेज हुआ है, जब छात्रों ने ‘न्याय सत्याग्रह’ के तहत TRE-4 का नोटिफिकेशन जल्द जारी करने समेत कई मांगें उठायी थीं। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने सरकार को समयसीमा देकर मांगें पूरी करने की चेतावनी दी थी। इस आंदोलन के दौरान TRE-4 के अलावा BSSC, दरोगा भर्ती, परीक्षा में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक की जांच जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाये गये हैं। दिलीप कुमार ने एकल परीक्षा और नकारात्मक अंकन खत्म करने की मांग भी रखी है।
इस आंदोलन के दौरान छात्र नेता दिलीप ने राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी का रुख भी जाहिर किया था, 18 अगस्त को उन्होंने कहा था कि धरना स्थल पर बैठे छात्र किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं हैं और वे अपने मुद्दों को लेकर अलग रहेंगे। अब रौशन आनंद के हस्तक्षेप और छात्रों को एक मंच पर आने की अपील के बाद आंदोलन के भीतर नेतृत्व और एकजुटता का मुद्दा सामने आ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र नेता अलग-अलग मंचों से आंदोलन जारी रखते हैं या छात्रों की मांगों को लेकर एक साझा मंच तैयार होता है।







