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औरंगाबाद के किसानों की जमीन पर बिछेगी रेल लाइन! बिहार में विकास की नई रफ्तार, पर उठ रहे गंभीर सवाल

Bihar Rail Project: अनुग्रह नारायण रोड से औरंगाबाद तक 12 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू हो गया है। 11 गांवों के किसान उचित मुआवजे और अंडरपास की मांग पर अड़े हैं, जिससे प्रशासन के सामने विकास और समाधान दोनों की चुनौती खड़ी हो गई है।

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Bihar Rail Project: बिहार में एक बड़ी रेल परियोजना, औरंगाबाद-बिहटा रेल लाइन, पर काम तेजी से शुरू हो गया है। अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन से औरंगाबाद शहर तक लगभग 12 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की प्रक्रिया में जमीन अधिग्रहण ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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जिला भू-अर्जन कार्यालय ने इस महत्वपूर्ण बिहार रेल प्रोजेक्ट के लिए लगभग 85.9118 एकड़ जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह रेल लाइन सदर प्रखंड के 11 गांवों से होकर गुजरेगी, जिनमें जम्होर, जगदीशपुर, जोकहरी, भरथौली, सुशनार, खैराबिंद, मोरौली, कठौतिया, रामपुर, परसा और कर्मा भगवान शामिल हैं।

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इस परियोजना के तहत श्री सीमेंट के उत्तर परसा गांव के पास एक टर्मिनल भी प्रस्तावित है। इससे औरंगाबाद शहर तक रेल सेवा की सीधी पहुंच होगी, जिससे व्यापार, नौकरी और शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की आवाजाही काफी आसान हो जाएगी। यह क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।

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किसानों की बढ़ी मुश्किलें, विकास बनाम जमीन का सवाल

हालांकि, इस विकास की कीमत कुछ किसानों को चुकानी पड़ रही है। कई स्थानों पर यह रेल लाइन खेतों के बीच से गुजरेगी, जिससे किसानों के भूखंड दो हिस्सों में बंट जाएंगे। किसानों का कहना है कि ऐसे में खेत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाना और खेती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

उचित मुआवजे और अंडरपास की मांग पर अड़े किसान

किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, वे खेतों को दो हिस्सों में बंटने से बचाने के लिए अंडरपास बनाने की भी मांग कर रहे हैं। उनकी यह मांग प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी की ओर से रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने का आदेश दिया गया है।

औरंगाबाद-बिहटा रेल परियोजना का अहम हिस्सा

यह नई रेल लाइन औरंगाबाद-बिहटा रेल परियोजना का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशासन अब किसानों और रेलवे अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने में जुटा है, ताकि विकास कार्य भी आगे बढ़े और किसानों की समस्याओं का भी संतोषजनक निवारण हो सके।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन किस तरह इस चुनौती का सामना करता है। यह परियोजना औरंगाबाद के लिए जहां नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी, वहीं किसानों के लिए न्यायपूर्ण समाधान भी उतना ही आवश्यक है।

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