Bihar Farakka Treaty: बिहार में फरक्का संधि को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधान पार्षद नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 12 दिसंबर 1996 को हुई भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि को लेकर लालू यादव की तत्कालीन भूमिका पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है। नीरज कुमार का आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य के जल संसाधन विभाग ने इस संधि को बिहार के हित में नहीं मानते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद संधि पर आगे बढ़ने को लेकर उन्होंने लालू यादव से स्पष्टीकरण मांगा है।
फरक्का संधि क्या है और बिहार का क्या है हित?
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर फरक्का संधि 12 दिसंबर 1996 को नई दिल्ली में हुई थी। यह समझौता फरक्का में गंगा के पानी को लेकर दोनों देशों के बीच बंटवारे की व्यवस्था तय करता है। इस संधि की अवधि 30 साल रखी गई थी और इसमें हर साल 1 जनवरी से 31 मई तक कम प्रवाह वाले मौसम में पानी के बंटवारे का प्रावधान किया गया था। इस संधि में पानी के बंटवारे का फॉर्मूला इस प्रकार है:
- 70 हजार क्यूसेक या उससे कम प्रवाह: दोनों देशों के लिए 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी।
- 70 हजार से 75 हजार क्यूसेक के बीच प्रवाह: बांग्लादेश के लिए 35 हजार क्यूसेक का प्रावधान।
- 75 हजार क्यूसेक या उससे अधिक प्रवाह: भारत के लिए 40 हजार क्यूसेक और शेष पानी बांग्लादेश के हिस्से में।
पानी के बंटवारे की निगरानी के लिए एक संयुक्त समिति का भी प्रावधान किया गया था। भारत सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था हर साल कम प्रवाह वाले मौसम में लागू होती रही है।
लालू यादव पर नीरज कुमार के तीखे आरोप
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने सवाल उठाया है कि जब बिहार के हितों को लेकर आपत्ति सामने आई थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की भूमिका क्या थी। नीरज कुमार ने साफ तौर पर कहा कि बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने उस समय फरक्का संधि को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका सवाल है कि अगर विभाग को बिहार के हितों पर असर की आशंका थी, तो राज्य सरकार ने इस मुद्दे को मजबूती से क्यों नहीं उठाया। इसी आधार पर उन्होंने लालू प्रसाद यादव से सीधे जवाब की मांग की है।
नीरज कुमार ने कहा, “अगर बिहार के जल संसाधन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई थी, तो तत्कालीन राज्य सरकार ने इस आपत्ति को किस स्तर पर उठाया था? क्या उस समय सत्ता में बने रहने की राजनीतिक मजबूरी के कारण बिहार के हितों से समझौता किया गया था? लालू प्रसाद यादव को इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।”
क्या राजनीतिक मजबूरी थी बिहार के हितों की अनदेखी की वजह?
नीरज कुमार ने लालू यादव पर आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या उस समय सत्ता में बने रहने की राजनीतिक मजबूरी के कारण बिहार के हितों से समझौता किया गया था। उन्होंने राजद की ओर से फरक्का संधि को लेकर उठाए जा रहे मौजूदा सवालों के बीच 1996 की परिस्थितियों और तत्कालीन बिहार सरकार की भूमिका को मुद्दा बनाया है। नीरज कुमार ने लालू यादव की ओर से जारी एक वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें राजद फरक्का संधि पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा कि राजद को पहले उस समय की अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
जेडीयू और आरजेडी के बीच इस नए राजनीतिक विवाद से फरक्का संधि एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब देखना होगा कि लालू प्रसाद यादव या आरजेडी इस मामले पर नीरज कुमार के आरोपों का क्या जवाब देते हैं और यह सियासी खींचतान आगे क्या मोड़ लेती है।







