Bihar Flood: मानसून की सक्रियता के साथ बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है, जिसके बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हवाई सर्वेक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को रावण के ‘पुष्पक विमान’ का उदाहरण देते हुए जमीन पर उतरकर पीड़ितों के बीच जाने की सलाह दी।
तेजप्रताप यादव ने क्या लिखा-सम्राट चौधरी जी, माननीय मुख्यमंत्री जी, आपसे हमको यही कहना है कि
आप जिस तरीके से अपना पुष्पक विमान लेकर के आप बाढ़ प्रभावित एरिया में जो आप घूम रहे हैं, उससे ज़्यादा बेहतर अच्छा था कि आप नाव पे बैठ करके अपने हाथ से राशन बाँटते। लेकिन वो तो आप करिएगा नहीं, क्योंकि जिस तरीके से जब से आप मुख्यमंत्री बने हैं, तब से लेके अभी तक आप जो करनामा दिखाए हैं अपना पूरे बिहार में, जो जलवा बिखेरने का आप काम किए हैं, उससे कितना जनता दुखी है और कितना जनता परेशान है। और ऐसे सिचुएशन में जिस तरीके से बाढ़ प्रभावित इलाकों में जो आप अपना पुष्पक विमान लेकर के जिस तरीके से जो घूम रहे हैं, जैसे पूर्वकाल में रावण जो पुष्पक विमान लेकर के घूमता था, उसी प्रकार आप पुष्पक विमान लेकर के घूम रहे हैं। आप जाइए गरीब गुरबा से नाव पे बैठिए और हालचाल लीजिए। पुष्पक विमान का सपना त्यागिए, इससे बिहार ऊँचाइयों तक नहीं जाएगा और धरातल में गिरेगा!
मुख्यमंत्री के हवाई दौरे पर ‘पुष्पक विमान’ का तंज
तेज प्रताप यादव ने 24 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पटना, बेगूसराय और भागलपुर के बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों के हवाई जायजे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बजाय नाव पर बैठकर लोगों के बीच जाना चाहिए। तेज प्रताप ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री को अपने हाथों से राहत सामग्री बांटनी चाहिए और बाढ़ पीड़ितों का हाल जानना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के हवाई दौरे की तुलना रावण के ‘पुष्पक विमान’ से की और कहा कि उन्हें यह ‘पुष्पक विमान’ का सपना छोड़कर जमीन पर उतरकर गरीब और प्रभावित परिवारों की स्थिति देखनी चाहिए।
बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई जायजा और सरकारी निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने हवाई सर्वेक्षण के दौरान नवगछिया, राघोपुर दियारा और कोसी-गंगा संगम क्षेत्र सहित कई इलाकों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान बेगूसराय और बख्तियारपुर के आसपास के क्षेत्रों की भी समीक्षा की गई। हवाई सर्वेक्षण के बाद, मुख्यमंत्री ने भागलपुर एयरपोर्ट पर अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति को लेकर एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील और निचले इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए, साथ ही राहत और बचाव कार्य तेज करने को कहा। प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने और आवश्यक मरम्मत कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बाढ़ की स्थिति के बीच गंगा में पानी के दबाव को कम करने के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से बातचीत की, जिसके बाद फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गंगा में पानी का दबाव कम करना बताया गया है।
आगे चलकर राज्य सरकार बाढ़ से निपटने और प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए कई कदम उठा रही है। नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है और पश्चिम बंगाल के साथ अंतरराज्यीय समन्वय स्थापित कर फरक्का बराज के गेट भी खोले गए हैं। आने वाले दिनों में इन उपायों का कितना असर होता है और राजनीतिक बयानबाजी किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।








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