Bihar TRE-4 Syllabus Change: शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 (TRE-4) की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में एक बड़ा बदलाव होने की संभावना है। बिहार के शिक्षा विभाग ने इस संबंध में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। इस पत्र में प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं, जिन पर BPSC को अंतिम फैसला लेना है।
टीआरई-4 के सिलेबस में क्या हो सकता है बदलाव?
शिक्षा विभाग ने अपने सुझाव में कहा है कि टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा में 50 प्रतिशत सवाल बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) से पूछे जाएं। वहीं, बाकी 50 प्रतिशत सवाल सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन से संबंधित हों। छात्र संघों की मांग पर, इन 50 प्रतिशत सवालों में से 30 प्रतिशत सवाल बिहार से जुड़े सामान्य ज्ञान पर आधारित रखने का सुझाव दिया गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि बीएड और डीएलएड कर शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों के लिए बाल मनोविज्ञान और शिक्षण कौशल की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। इसी आवश्यकता को देखते हुए छात्र संघों ने बाल मनोविज्ञान से 50 प्रतिशत प्रश्न शामिल करने की मांग की थी, जिसे अब विभाग ने BPSC के समक्ष रखा है।
बिहार से जुड़े सामान्य ज्ञान पर खास जोर
प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन के बाकी 50 प्रतिशत सवालों में से 30 प्रतिशत प्रश्न बिहार के विशिष्ट संदर्भ पर आधारित हो सकते हैं। इन सवालों में बिहार का विस्तृत इतिहास, राज्य की राजनीति, अर्थव्यवस्था और भौगोलिक जानकारी जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए जा सकते हैं। यह बदलाव राज्य के शिक्षकों से स्थानीय ज्ञान की अपेक्षा को दर्शाता है।
छात्र संघों से बैठक के बाद BPSC को भेजा गया पत्र
टीआरई-4 की आगामी परीक्षा को लेकर विभिन्न छात्र संघों ने शिक्षा विभाग के सामने कई मांगें रखी थीं। इन मांगों पर सोमवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और छात्र संघों के प्रतिनिधियों के बीच एक लंबी बैठक हुई। सोमवार देर शाम तक चली इस बैठक के बाद, शिक्षा विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग को पत्र भेजकर छात्र संघों की सभी मांगों से अवगत कराया।
शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने सोमवार देर रात बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को यह पत्र भेजा। पत्र में स्पष्ट किया गया कि छात्र संघों के प्रतिनिधियों ने विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत कर परीक्षा से जुड़ी अपनी मांगें रखी हैं।
‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ की मांग भी आयोग तक पहुंचाई गई है। छात्र संघों ने यह मांग भी उठाई है कि टीआरई-4 में ‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ का सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि एक ही अभ्यर्थी कई पदों पर चयनित होकर सीटें ब्लॉक न करे। शिक्षा विभाग ने इस मांग को भी BPSC को भेज दिया है और आयोग से छात्र संघों की मांगों पर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
अब यह देखना होगा कि टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में ये प्रस्तावित बदलाव होते हैं या नहीं। इन सभी सुझावों और मांगों पर अंतिम फैसला बिहार लोक सेवा आयोग ही लेगा।







