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भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप! बाढ़ ने छीना घर, शहर से संपर्क टूटा, एक वक्त के खाने को तरसे लोग

Bhagalpur Flood: भागलपुर के दियारा क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दर्जनों परिवार बेघर होकर प्लास्टिक के सहारे दिन गुजार रहे हैं, भोजन और जलावन की किल्लत से जूझ रहे पीड़ित तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

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Bhagalpur Flood: भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दियारा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। भागलपुर के बाढ़ के कहर ने शंकरपुर और दिलदारपुर जैसे गांवों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं।

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शहर से संपर्क टूटा, बेघर हुए दर्जनों परिवार

गंगा में लगातार बढ़ रहे पानी के कारण दियारा क्षेत्र का शहर से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बाढ़ का पानी खेतों और घरों में घुसने से ग्रामीण अपने परिवार और जरूरी सामान समेटकर ऊंचे स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। कई परिवार प्लास्टिक की झोपड़ियों में जैसे-तैसे दिन-रात काट रहे हैं, जहां जीवन की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।

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एक वक्त के खाने पर गुजारा, जलावन की भी किल्लत

बाढ़ ने विस्थापित परिवारों के सामने भोजन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पीड़ितों का दर्द बयां करते हुए एक ग्रामीण ने कहा,

“एक समय का खाना बनाकर उसी से दोनों वक्त गुजारा करना पड़ रहा है।”

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कई परिवारों के पास जलावन न होने के कारण खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें सत्तू खाकर या भूखे रहकर दिन गुजारने पड़ रहे हैं। यह स्थिति उनकी दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।

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हर साल की त्रासदी, स्थायी समाधान की आस

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह त्रासदी हर साल आती है। हर वर्ष बाढ़ के दौरान उन्हें अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा,

“हर साल बाढ़ के दौरान उन्हें अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ता है। बावजूद इसके उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।”

अब ये बाढ़ प्रभावित परिवार सरकार और प्रशासन से तत्काल मदद और दीर्घकालिक समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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लोगों ने मांग की है कि प्रभावित इलाकों में तुरंत भोजन, स्वच्छ पेयजल, जलावन और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन को इन परिवारों की सुध लेते हुए जल्द से जल्द सहायता पहुंचानी होगी, ताकि वे इस मुश्किल घड़ी से उबर सकें और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ठोस योजना बनाई जा सके।

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