Bihar Legal Aid: अब कानून सिर्फ अदालतों और किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह Bihar के गाँव-गाँव तक पहुँचेगा। भागलपुर में 255 पारालीगल वॉलंटियर्स को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। इन ‘कानून के प्रहरियों’ का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना और कानून को जन-जन तक पहुँचाना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, भागलपुर की पहल पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में भागलपुर और बांका जिले के कुल 255 पारालीगल वॉलंटियर्स शामिल हुए। इनमें बांका से 65 और भागलपुर से 190 स्वयंसेवक थे। प्रशिक्षण के बाद ये सभी वॉलंटियर्स अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
क्यों जरूरी हैं ‘कानून के प्रहरी’?
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अक्सर अपने कानूनी अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होती। कई बार वे यह भी नहीं समझ पाते कि किसी समस्या के सामने आने पर उन्हें किस विभाग या संस्था से संपर्क करना चाहिए। सही आवेदन प्रक्रिया और कानूनी मदद प्राप्त करने के तरीकों से वे अनजान रह जाते हैं।
जानकारी के अभाव में लोग अपने हक से वंचित हो जाते हैं। आधार कार्ड से जुड़े छोटे मामलों से लेकर बड़े कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं तक, सही जानकारी का अभाव उन्हें परेशान करता है। ऐसे में पारालीगल वॉलंटियर्स एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर काम करेंगे, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानूनी ज्ञान पहुँचाएंगे।
गाँव-गाँव तक पहुंचेगी कानूनी मदद
प्रशिक्षण के दौरान वॉलंटियर्स को समझाया गया कि वे लोगों को उनके हक, अधिकार और कानूनी सहायता के बारे में कैसे बताएँ। उन्हें यह भी सिखाया गया कि निशुल्क कानूनी सहायता कब और कैसे मिल सकती है, और कहाँ शिकायत दर्ज करनी है।
ये सभी प्रशिक्षित स्वयंसेवक अब गांव-गांव जाकर लोगों को कानूनी प्रावधानों, उनके अधिकारों और सरकारी सहायता के बारे में जागरूक करेंगे। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को सिर्फ जानकारी की कमी के कारण अपने हक से वंचित न होना पड़े। भागलपुर और बांका कमीशनरी के इन वॉलंटियर्स को इसी बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार किया गया है।
यह एक दिवसीय कार्यक्रम इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि हर नागरिक को अपने अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए। अब ये ‘कानून के प्रहरी’ यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्रामीण और आम लोग भी अपने कानूनी अधिकारों को समझें और उनका लाभ उठा सकें।







