Kamtoul Monsoon: आंचल कुमारी दरभंगा। बिहार के कमतौल-अहियारी में मॉनसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। पूरा सावन सूखा बीत जाने के बाद किसानों को भादो से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इस महीने के दूसरे दिन भी निराशा ही हाथ लगी है। पांच मिनट की हल्की बारिश के बाद उमस और गर्मी ने लोगों को और भी बेहाल कर दिया है, जिससे खेत की दरारें जस की तस बनी हुई हैं।
पांच मिनट की बारिश, फिर लौटी उमस: कमतौल मॉनसून का हाल
रविवार दोपहर को आसमान में काले बादल छाए, जिससे लगा कि अब झमाझम बारिश होगी और धरती की प्यास बुझेगी। हालांकि, सिर्फ पांच मिनट की छींटा-छींटी के बाद बादल फिर बिखर गए। इस बेहद कम बारिश से न तो धरती की प्यास बुझ पाई और न ही खेतों को कोई राहत मिली। इसके बाद भीषण उमस ने स्थानीय निवासियों को और परेशान कर दिया।
सूखने की कगार पर धान की फसल, किसानों पर पूंजी डूबने का संकट
मॉनसून की इस बेरुखी का सीधा असर धान की फसलों पर पड़ रहा है। खेतों में पड़ी दरारें अभी भी मौजूद हैं और धान के पौधे पीले पड़कर सूखने लगे हैं। जिन किसानों ने कर्ज लेकर डीजल पंप से सिंचाई कर किसी तरह धान की रोपाई की थी, उनकी फसल अब सूखने की कगार पर है। यह स्थिति उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाली साबित हो रही है।
किसानों का कहना है, “अगर एक-दो दिनों में मूसलाधार बारिश नहीं हुई तो हमारी पूरी पूंजी डूब जाएगी।”
इस संकट के बीच, बिजली की लगातार ट्रिपिंग से डीजल पंप भी ठीक से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और कम हो गई है। वहीं, भूगर्भीय जलस्तर भी तेजी से नीचे खिसक रहा है, जिसके कारण कमतौल अहियारी के वार्ड 11 समेत कई इलाकों में चापाकल भी फेल हो चुके हैं।
आगे क्या? बारिश का इंतजार और बढ़ती चुनौतियां
किसान अब बेसब्री से मूसलाधार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यही उनकी एकमात्र उम्मीद बची है। अगर अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो कमतौल-अहियारी क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। यह स्थिति राज्य सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।







