Bihar Excise Act: बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए अदालतों में भी तेजी से सुनवाई हो रही है। इसी कड़ी में दरभंगा जिला में उत्पाद अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अगस्त महीने के दौरान, उत्पाद अधिनियम के विशेष न्यायाधीश द्वितीय रंजन कुमार मिश्रा की अदालत ने एक माह के भीतर 254 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इन सभी से कुल 3 लाख 28 हजार रुपये का अर्थदंड वसूला गया है।
दरभंगा में एक्शन! शराबबंदी कानून तोड़ने वाले 254 लोगों को एक महीने में मिली सजा
Darbhanga Excise Act: बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए दरभंगा की अदालत ने बड़ी कार्रवाई की है। उत्पाद अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय ने अगस्त महीने के भीतर 254 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इन सभी दोषियों से कुल 3 लाख 28 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों पर न्यायिक प्रक्रिया तेजी से काम कर रही है।
उत्पाद अधिनियम के विशेष न्यायाधीश द्वितीय रंजन कुमार मिश्रा की अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अगस्त माह में एक महीने के अंदर इतनी बड़ी संख्या में आरोपियों को दोषी ठहराया गया। यह दर्शाता है कि मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा रही है।
तेजी से निपटाई गई 254 मामलों की सुनवाई
विशेष लोक अभियोजक (Special APP) हेमंत कुमार ने इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्पाद अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में पकड़े गए 254 अभियुक्तों को प्रथम अपराध होने के संदर्भ में संशोधित कानून का लाभ दिया गया। इसके तहत, न्यायालय ने सभी को अर्थदंड की सजा सुनाई। यह प्रावधान उन लोगों के लिए है जिनका यह पहला अपराध होता है।
सभी दोषी ठहराए गए अभियुक्तों को अर्थदंड की राशि अदालत के नाजिरत में जमा करने का आदेश दिया गया। इसके बाद, अगस्त माह में ही सभी 254 दोष सिद्ध अभियुक्तों ने कुल 3 लाख 28 हजार रुपये का जुर्माना कोर्ट नाजिरत में जमा कर दिया।
जुर्माना जमा करने के बाद हुए रिहा
जैसे ही सभी दोषियों ने जुर्माने की राशि जमा की, न्यायालय ने उनके मुकदमे समाप्त कर दिए। इसके बाद, सभी अभियुक्तों को मुक्त कर दिया गया। यह प्रक्रिया न केवल न्यायिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि कानून के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई हो। दरभंगा में हुई यह कार्रवाई राज्य भर में शराबबंदी को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए न्यायपालिका भी सक्रिय है। भविष्य में भी इसी तरह की त्वरित न्यायिक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, ताकि कानून का उल्लंघन करने वालों पर अंकुश लगाया जा सके।
एक महीने में 254 दोषियों पर फैसला, लाखों का जुर्माना
विशेष न्यायाधीश द्वितीय रंजन कुमार मिश्रा की अदालत ने उत्पाद अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप में इन सभी 254 व्यक्तियों को दोषी पाया। उत्पाद के स्पेशल एपीपी हेमंत कुमार ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि यह सभी फैसले अगस्त माह के भीतर दिए गए हैं, जो न्याय प्रक्रिया की तेजी को दर्शाता है।
उत्पाद के स्पेशल एपीपी हेमंत कुमार ने बताया कि ‘उपरोक्त सभी आरोपियों को प्रथम अपराध होने के सन्दर्भ में प्रावधानित संशोधित कानून का लाभ प्रदान करते हुए श्री मिश्रा की कोर्ट सभी को अर्थदंड की सजा सुनाई है।’
संशोधित कानून का मिला लाभ, पहली बार के दोषियों को राहत
हेमंत कुमार ने स्पष्ट किया कि जिन 254 आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उन्हें संशोधित कानून के तहत पहली बार अपराध करने का लाभ दिया गया। अदालत ने उन्हें जेल की सजा के बजाय अर्थदंड भरने का आदेश दिया। इन सभी दोषियों ने आदेश का पालन करते हुए कोर्ट नजारत में अर्थदंड की राशि जमा की।
अगस्त महीने में कुल 3 लाख 28 हजार रुपये की राशि कोर्ट नजारत में जमा की गई। अर्थदंड जमा होने के बाद न्यायालय ने सभी मुकदमों को समाप्त कर आरोपियों को मुक्त कर दिया। यह प्रक्रिया न सिर्फ न्यायिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि छोटे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करती है।
दरभंगा जिला अदालत की यह कार्रवाई बिहार उत्पाद अधिनियम के तहत अपराधों पर त्वरित न्याय और सख्त रुख का महत्वपूर्ण संकेत देती है। यह उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो शराबबंदी कानून का उल्लंघन करते हैं, कि उन्हें जल्द ही कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।







