Bihar Reservation: बिहार में बिहार आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विवाद के बजाय संवाद के जरिए ही इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि वंचित वर्गों जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के हितों का संरक्षण तो आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही सवर्ण समाज की चिंताओं को भी सरकार को दूर करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी एक वर्ग के हितों की रक्षा का मतलब यह नहीं हो सकता कि दूसरे वर्ग का शोषण किया जाए।
आरक्षण खत्म करने का सवाल ही नहीं, समानता आने तक जारी रहना चाहिए
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बयान में कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक समानता स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में जो व्यवस्था बनी, उसका मकसद उन वर्गों को मुख्यधारा में लाना था जो लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि आरक्षण की व्यवस्था भले ही शुरू में सीमित अवधि के लिए थी, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा तबका पूरी तरह से आगे नहीं बढ़ पाया है। कुशवाहा का मानना है कि जब तक वास्तविक समानता नहीं आ जाती, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी और इसे खत्म करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
‘कोटे में कोटा’ पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला, चिराग पासवान पर सीधा हमला
आरक्षण के भीतर कोटा तय करने की व्यवस्था का उपेंद्र कुशवाहा ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के बीच विकास का स्तर एक समान नहीं है। कुशवाहा के अनुसार, जिन समुदायों की साक्षरता दर बेहद कम है, उन्हें आरक्षण का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से ‘कोटे में कोटा’ की व्यवस्था लाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस व्यवस्था को उचित ठहराया है।
चिराग पासवान के रुख को लेकर कुशवाहा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘जिस व्यक्ति ने जमीन पर संघर्ष और अभाव नहीं देखा, उसके लिए वंचित समाज की पीड़ा को समझना मुश्किल हो सकता है।’
कुशवाहा ने आगे कहा कि आज भी झोपड़ियों और बेहद गरीब बस्तियों में रहने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा और साक्षरता की स्थिति बेहद चिंताजनक है। ऐसे वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्था बेहद जरूरी है।
सवर्णों की चिंता भी सुने सरकार, संसद में हो व्यापक विमर्श
उपेंद्र कुशवाहा ने सवर्ण समाज की चिंताओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर सवर्ण समाज के लोगों के मन में किसी भी तरह की चिंता या असुरक्षा है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी बताई कि अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ दूसरे वर्गों की चिंताओं का भी समाधान करे। कुशवाहा ने लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास और चिराग पासवान को लेकर भी इसी संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने संसद में आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक विमर्श की वकालत करते हुए सभी से आपसी विवाद से बचने की अपील की।
सम्राट चौधरी को हटाने की चर्चाएं खारिज, बताया अस्थिरता फैलाने की साजिश
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पद से हटाए जाने की चल रही चर्चाओं को उपेंद्र कुशवाहा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बात कहां से आई और किसने कही, यह समझ से परे है। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि सम्राट चौधरी विधिवत अपना काम कर रहे हैं और उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी को एनडीए के नेता के रूप में चुना गया है और वह अच्छा काम कर रहे हैं।
कुशवाहा ने इस तरह की चर्चाओं को राज्य में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में एनडीए नेतृत्व को लेकर किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति नहीं है और ऐसी अफवाहें फैलाने वाले लोग राज्य के हित में काम नहीं कर रहे हैं।







