Bihar AADM: बिहार के बांका जिले में अपर समाहर्ता (एडीएम) अजीत कुमार के अचानक गायब होने का मामला अब बेहद गंभीर हो गया है। चार दिन की छुट्टी पर गए एडीएम एक माह बाद भी कार्यालय नहीं लौटे हैं, जिससे एडीएम कोर्ट में राजस्व और भूमि विवाद से जुड़े दर्जनों मामलों की सुनवाई ठप हो गई है। राज्य मुख्यालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है और उन्हें 31 अगस्त तक पदभार ग्रहण करने का अंतिम निर्देश दिया है, अन्यथा कठोर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एडीएम की अनुपस्थिति से ठप हुए अहम कार्य
अपर समाहर्ता अजीत कुमार ने 23 से 27 जुलाई तक आकस्मिक छुट्टी का आवेदन दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के एक माह बाद भी वे कार्यालय नहीं लौटे हैं। उनकी इस अनाधिकृत अनुपस्थिति का सबसे बड़ा असर एडीएम कोर्ट की न्यायिक सुनवाई पर पड़ा है। दाखिल-खारिज अपील, भूमि विवाद और अन्य राजस्व वाद जैसे महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा अधर में लटक गया है, जिससे पक्षकार रोजाना कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
एडीएम के जिम्मे जिले के कई अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण दायित्व थे। इनमें प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले में नोडल पदाधिकारी का प्रभार शामिल था। उनकी अनुपस्थिति से प्रशासनिक समन्वय पर गहरा असर पड़ा है। हालांकि, दैनिक और रूटीन प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन के लिए जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने उप विकास आयुक्त (डीडीसी) उपेंद्र सिंह को प्रभारी एडीएम का दायित्व सौंपा है, लेकिन कानूनी बाध्यताओं के कारण एडीएम कोर्ट की न्यायिक सुनवाई नहीं हो पा रही है।
मुख्यालय की सख्त चेतावनी: 31 अगस्त तक लौटें या कार्रवाई झेलें
जिला प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम से राज्य मुख्यालय को अवगत करा दिया है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने एक विशेष आदेश जारी कर अपर समाहर्ता अजीत कुमार को 31 अगस्त तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित होकर योगदान देने का अंतिम निर्देश दिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है: ‘यदि वे निर्धारित तिथि तक पदभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध अनुशासनिक एवं कठोर विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।’
इस चेतावनी से स्पष्ट है कि यदि अजीत कुमार तय समय सीमा तक नहीं लौटते हैं, तो उन्हें गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उनकी अनुपस्थिति से उत्पन्न हुई न्यायिक और प्रशासनिक बाधाओं को देखते हुए, मुख्यालय का यह सख्त कदम आवश्यक माना जा रहा है।







