Bihar Student Movement: बिहार में एक बार फिर छात्र राजनीति की गरमाहट महसूस की जा रही है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने राज्य के युवाओं और GenZ को पटना पहुंचने का आह्वान किया है। उनके इस निमंत्रण के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या राजधानी में शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर एक बड़ा Bihar Student Movement आकार लेने वाला है?
नेहा बोरा, जो पहले ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ और 23 दिनों की भूख हड़ताल को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं, अपनी सक्रिय छात्र राजनीति के लिए जानी जाती हैं। अब उनकी पटना यात्रा और GenZ से अपील ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है।
पटना में क्यों बुलाया गया GenZ को?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 6 सितंबर को पटना पहुंचेंगी और सुबह 11 बजे SK मेमोरियल हॉल में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होंगी। उन्होंने बिहार के GenZ छात्रों और युवाओं से बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की है। इस आह्वान के बाद छात्र राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है।
इस कार्यक्रम में युवाओं से जुड़े मुद्दों और छात्र हितों से संबंधित विषयों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। नेहा बोरा की छात्र राजनीति और आंदोलनों में भूमिका को देखते हुए, इस आयोजन पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की भी पैनी नजर बनी हुई है।
नेहा बोरा ने एक वीडियो संदेश में कहा, “बिहार, जहां हाल के घटनाक्रमों में AK-चला, गनशॉट से कई छात्र घायल हुए, साथ ही 15 वर्ष के युवाओं पर केस किया गया। यहां युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा समेत कई चुनौतियां हैं। अब इसी बिहार के नौजवान बदलाव की आवाज उठाने की तैयारी में हैं। इसी पहल के तहत मैं 6 सितंबर को पटना पहुंच रही हूं।”
उन्होंने बिहार के युवाओं और GenZ से इस कार्यक्रम में शामिल होकर बदलाव की इस पहल का हिस्सा बनने का आह्वान किया है।
कौन हैं नेहा बोरा: JNU से लेकर राष्ट्रीय पहचान तक
नेहा बोरा का मूल संबंध उत्तराखंड से है, लेकिन उनका बचपन कई शहरों में बीता, जिसमें पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी भी शामिल है। विभिन्न राज्यों और शहरों में रहने से उन्हें विविध सामाजिक और शैक्षणिक वातावरण को करीब से समझने का अवसर मिला, जिसकी झलक उनके विचारों और छात्र राजनीति में भी साफ दिखती है।
बचपन से ही नेहा की दिलचस्पी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं थी। वे थिएटर, साहित्य, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़ी रहीं। समय के साथ, शिक्षा और सामाजिक आंदोलन उनके सार्वजनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए।
- स्कूली शिक्षा: दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), सिलीगुड़ी और आर्मी पब्लिक स्कूल, बेंगलुरु से।
- उच्च शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से एमए।
- वर्तमान: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी कर रही हैं।
नेहा का मानना है कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों को अपने विचार रखने, सवाल पूछने और विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बहस करने का अवसर भी मिलना चाहिए।
शुरुआत में नेहा ने राजनीति को करियर के रूप में नहीं चुना था। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे छात्र समस्याओं से जुड़े कार्यक्रमों, बैठकों और अभियानों में हिस्सा लेने लगीं। फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति, हॉस्टल सुविधाओं, सार्वजनिक शिक्षा और अन्य छात्र मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। इसी क्रम में वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ीं और दिल्ली इकाई में भी काम किया। लंबे समय तक संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद उन्हें AISA के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।
23 दिनों का अनशन और कॉकरोच प्रोटेस्ट: जब नेहा बोरा बनीं सुर्खियों का हिस्सा
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नेहा बोरा छात्र राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। JNU की छात्र राजनीति में AISA का प्रभाव लंबे समय से रहा है। नेहा की पहचान शिक्षा नीति, परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, सार्वजनिक शिक्षा, रोजगार और छात्र अधिकारों जैसे मुद्दों पर हुए आंदोलनों से जुड़ी रही है।
नेहा बोरा उस समय व्यापक चर्चा में आईं, जब एक छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने लगातार 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। इस लंबे अनशन के दौरान उनकी सेहत काफी बिगड़ गई थी। दावा किया गया कि उनका वजन करीब साढ़े छह किलो कम हो गया और ब्लड प्रेशर भी काफी नीचे चला गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने उनसे मुलाकात की। अभिनेत्री शबाना आजमी भी जंतर-मंतर पहुंचीं और नेहा का हाल जाना। बाद में शबाना आजमी के हाथों ही नेहा का अनशन समाप्त कराया गया। जंतर-मंतर पर चले इस छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी नेहा से मुलाकात की। सांसद चंद्रशेखर आजाद समेत अन्य सामाजिक और राजनीतिक लोगों की मौजूदगी के कारण इस आंदोलन को और अधिक चर्चा मिली, जिससे नेहा बोरा राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियों में रहीं।
छात्र आंदोलन से जुड़े अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन के दौरान नेहा बोरा का नाम कुछ विवादों को लेकर भी चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान लगाए गए कुछ नारों को लेकर विरोधियों ने सवाल उठाए थे। इसके अलावा, स्वतंत्र पत्रकार रुचि तिवारी से जुड़े कथित विवाद की चर्चा भी सोशल मीडिया पर हुई। हालांकि, इन मामलों को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। AISA की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि संगठन छात्रों के अधिकारों और उनके मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करता है।
नेहा बोरा का यह पटना दौरा और GenZ से उनका आह्वान, बिहार में छात्र राजनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। 6 सितंबर के कार्यक्रम से यह साफ हो जाएगा कि राज्य के युवा इन मुद्दों पर किस हद तक लामबंद होते हैं और यह आंदोलन कितनी बड़ी शक्ल अख्तियार करता है।







