Bihar Land: पटना। बिहार में जमीन से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने विधानसभा में दो महत्वपूर्ण भूमि विधेयक प्रस्तुत किए थे, जिन्हें सदन ने अपनी मंजूरी दे दी है। इन विधेयकों के कानून का रूप लेने के बाद, कृषि भूमि का औद्योगिक या व्यावसायिक उपयोग करना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा, जबकि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के लिए लोगों को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इन दोनों विधेयकों को सदन के समक्ष पेश किया था। इनमें ‘बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026’ और ‘बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026’ शामिल हैं। ये विधेयक जुलाई 2026 के मानसून सत्र में सात अन्य विधेयकों के साथ पारित हुए थे।
कृषि भूमि का औद्योगिक इस्तेमाल अब हुआ आसान
पहला विधेयक, ‘बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026’, वर्ष 2010 के पुराने भूमि संपरिवर्तन अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त करता है। इस नए प्रावधान के तहत, किसान अब अपनी खेती योग्य भूमि को श्रेणी बदलने (कन्वर्जन) की लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरे बिना सीधे व्यावसायिक, आवासीय या औद्योगिक उपयोग में ला सकेंगे। सरकार का मानना है कि पुराना कानून राज्य में उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने में बाधा उत्पन्न कर रहा था। इस कदम से बिहार में निवेश आकर्षित होने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कानून अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।
दाखिल-खारिज के लिए अब देना होगा ₹200 शुल्क
दूसरे विधेयक, ‘बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026’ के अंतर्गत, अब दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने, अपील करने या रिकॉर्ड सुधार के लिए आवेदन करने पर ₹200 का शुल्क देना होगा। इससे पहले यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क थी। मंत्री जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह राशि राज्य के विकास कार्यों को गति देने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ली जा रही है। हालांकि, विपक्ष ने इसे एक अनावश्यक कर बताते हुए इसका विरोध किया था, लेकिन विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। शुल्क का यह नया प्रावधान अगस्त 2026 में गजट में प्रकाशित हो चुका है।
दोनों सदनों से पारित होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद, ये प्रावधान अब कानून का रूप ले चुके हैं, जिससे बिहार में भूमि उपयोग और राजस्व संग्रह के तरीके में महत्वपूर्ण परिवर्तन आएंगे।
इन नए कानूनों से राज्य में भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही यह औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को भी बढ़ावा दे सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि इन सुधारों से राज्य के राजस्व में वृद्धि हो, जिसका उपयोग जनहित के कार्यों में किया जा सके।







