Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा छह उम्मीदवारों की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। इस सूची ने जहां एक ओर चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने टिकट वितरण को लेकर अपनी ही पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी के पुराने, समर्पित कार्यकर्ताओं के बजाय नए चेहरों और ‘अवसरवादी’ लोगों को प्राथमिकता दी गई है।
रोहिणी आचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, ‘टिकट वितरण में लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अपेक्षा नए चेहरों तथा ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी गई, जिनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर पहले सवाल उठते रहे हैं।’ उन्होंने इस फैसले को पार्टी के पुराने कैडर के लिए बेहद निराशाजनक बताया, जिससे राजद के अंदरूनी कलह सामने आ गई है।


निष्ठावान ‘लालूवादियों’ की अनदेखी से बढ़ा असंतोष
राजद की राजनीति हमेशा से लालू प्रसाद यादव के विचारों से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं के भरोसे आगे बढ़ी है, यह बात रोहिणी आचार्य ने अपनी आपत्ति में दोहराई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव में प्रतिनिधित्व का मौका आता है, तब उन कार्यकर्ताओं को उचित अवसर क्यों नहीं मिलता जिन्होंने मुश्किल दौर में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। रोहिणी आचार्य के अनुसार, पार्टी के निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को नजरअंदाज करना उनके साथ सरासर अन्याय है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि, ‘अगर लगातार नए चेहरों या अवसर के हिसाब से राजनीतिक पाला बदलने वाले लोगों को तरजीह मिलेगी तो इससे कैडर के बीच असंतोष पैदा हो सकता है।’ यह बयान पार्टी के लिए भविष्य में बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब बिहार में चुनावी माहौल गर्म है।
पुराने कार्यकर्ताओं के साथ ‘वादाखिलाफी’ का आरोप
रोहिणी आचार्य ने इस पूरे प्रकरण को पार्टी के पुराने और निष्ठावान ‘लालूवादियों’ के साथ ‘वादाखिलाफी’ से जोड़ा है। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा और संगठन के लिए लंबे समय से खड़े रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक जिम्मेदारियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए।
राजद की ओर से छह नामों की घोषणा के बाद रोहिणी आचार्य की यह तीखी प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अपने स्तर पर यह फैसला लिया है, लेकिन रोहिणी आचार्य के बयान ने टिकट वितरण की प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी विधान परिषद चुनाव से पहले यह आंतरिक कलह राजद के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती है।








