Hartalika Teej: सनातन परंपरा में विवाहित महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। पटना समेत देशभर में महिलाएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। इस व्रत को निर्जला रहकर पूर्ण किया जाता है, जिसमें महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं। कुंवारी कन्याएं भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
हरतालिका तीज 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। चूंकि उदया तिथि के अनुसार ही पर्व-त्योहारों का निर्धारण होता है, इसलिए हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। व्रत के दिन भक्त सुबह से लेकर देर रात तक पूजा-अर्चना कर सकते हैं। महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर विधि-विधान से पूजन करती हैं। यह व्रत सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, जिसमें तीज कथा का श्रवण और मंत्रों का जाप किया जाता है।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व और कथा
यह पर्व देवी पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ा है, जिन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। आचार्य झा ने लिंग पुराण के संदर्भ में बताया कि माता पार्वती ने अन्न-जल त्याग कर यह तपस्या की थी। इसी कारण यह व्रत भक्ति, आस्था और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं इसे अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की इच्छा से यह व्रत रखती हैं।
आचार्य राकेश झा के अनुसार, 14 सितंबर को तृतीया और चतुर्थी का संयोग गौरी-गणेश योग तथा मातृ-पुत्र योग का निर्माण कर रहा है, जिसे पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
हरतालिका तीज 2026 के शुभ योग और मुहूर्त
14 सितंबर 2026 के लिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- अमृत काल: सुबह 5:36 बजे से सुबह 7:08 बजे तक
- शुभ योग: सुबह 8:40 बजे से सुबह 10:13 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक
- चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 1:17 बजे से शाम 5:54 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:54 बजे से रात 8:22 बजे तक
पूजा विधि और मंत्र
हरतालिका तीज के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर पूजन सामग्री अर्पित करती हैं और तीज कथा सुनती हैं। रात में जागरण कर शिव-पार्वती मंत्रों का जाप भी किया जाता है। परिवार और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अनुष्ठानों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
भगवान शिव के मंत्र
- ॐ हराय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ शंभवे नमः
- ॐ शूलपाणये नमः
- ॐ पिनाकवृषे नमः
- ॐ शिवाय नमः
- ॐ पशुपतये नमः
- ॐ महादेवाय नमः
माता पार्वती के मंत्र
- ॐ उमायै नमः
- ॐ पार्वत्यै नमः
- ॐ जगद्धात्र्यै नमः
- ॐ जगतप्रतिष्ठायै नमः
- ॐ शांतिरूपिण्यै नमः
- ॐ शिवायै नमः
हरतालिका तीज का यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं की दृढ़ निष्ठा और समर्पण को भी दर्शाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में दांपत्य जीवन के महत्व को उजागर करता है और आने वाले समय में भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता रहेगा, जिसमें श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।







