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बड़ी खबर: Ex CM हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के सभी पद, OSD के घर नकदी मिलने पर लिया फैसला या कोई अंदर की बात है! | पढ़िए – पूरी इनसाइड स्टोरी

Harish Rawat: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व ओएसडी से नकदी और आभूषण बरामदगी की खबरों के बीच नैतिकता के आधार पर कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण पदों से हटने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके कारण पार्टी का भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष कमजोर पड़े।

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Harish Rawat: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बड़े फैसले का ऐलान किया है। अपने पूर्व ओएसडी (विशेष कार्याधिकारी) के पास कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरों के बीच उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम के बाद हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने की घोषणा कर दी है। उत्तरखंड कांग्रेस मतलब हरीश रावत। दशकों तक, पहाड़ी राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे, हरीश रावत ही रहे। उन पर किस्मत भी खूब मेहरबान रही। एक-दो नहीं 3 बार वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे। वह राज्य कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं लेकिन अब उन्होंने अचानक कांग्रेस से विदाई ले ली। राज्यव्यापी यात्रा के निकालने की योजना थी लेकिन 78 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि अब रज्य कांग्रेस की राजनीति से विदा लेने का समय है।

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बड़ी खबर: Ex CM हरीश रावत ने छोड़े कांग्रेस के सभी पद, OSD के घर नकदी मिलने पर लिया फैसला या कोई अंदर की बात है! | पढ़िए - पूरी इनसाइड स्टोरी
हरीश रावत ने कांग्रेस के दो पदों से इस्तीफा देने का एलान किया। उनके निजी सहायक चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की थी। साल 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर अब रेड डाली गई है। इस्तीफे की कहानी, इससे कहीं ज्यादा अलग है।

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हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर बताया कि देहरादून में उनके पूर्व पीए (ओएसडी) से नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरें टीवी पर प्रसारित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मामले के वास्तविक तथ्य तो समय आने पर ही सामने आएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति, जिनका नाम जीना है, उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। रावत के अनुसार, जीना एक सज्जन, विनम्र और मेहनती व्यक्ति हैं।

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नैतिक जिम्मेदारी और पार्टी का संघर्ष

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अगर ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ या ऐसी कोई गलती किए जाने के प्रमाण सामने आते हैं, तो उन्हें ऐसे कृत्य पर लज्जा महसूस होगी। उन्होंने फिलहाल इन आरोपों पर विश्वास न होने की बात कही है। रावत ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में आगामी चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है। कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में वह नहीं चाहते कि उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के इस संघर्ष को कोई कमजोरी पहुंचे।

हरीश रावत ने कहा, ‘मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं। पार्टी के संघर्ष में मेरी वजह से कोई कमजोरी न आए, इसलिए मैं इन दोनों पदों से हटना चाहता हूं।’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उससे त्यागपत्र देने का सवाल ही नहीं उठता।

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हरीश सिंह रावत ने खुद कहा है कि उत्तराखंड में चुनावी माहौल शुरू हो चुका है और उनके खिलाफ एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब भी लोग उनसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे तो वे मजाक में कहते थे कि चुनाव तभी घोषित होंगे जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। इस बार उनके घर की बजाय उनके एक साथी के घर दस्तक देकर नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।

संगठन स्तर पर उपेक्षा के बाद भी वह कांग्रेस के खिलाफ नहीं जा रह हैं। उनका साफ कहना है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है। राहुल गांधी भी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे समय में अगर उनसे जुड़ी कोई कार्रवाई पार्टी की इस लड़ाई को कमजोर करती है तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे।

साल 2022 का विधानसभा चुनाव हरीश संह रावत को चेहरा बनाकर लड़ा गया था। चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अलाकमान ने करण माहरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बनाकर नई पीढ़ी को कमान सौंपने की कोशिश की। हरीश सिंह रावत की दखल कमजोर पड़ने लगी। मौजूदा अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ भी उनके रिश्ते ठीक नहीं रहे। गुटबाजी होती रही। वह चाहते थे कि नई पीढ़ी के नाम पर अब पार्टी की कमान उनके बेटे वीरेंद्र रावत को सौंपी जाए।

हरीश रावत की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह से भी नहीं बनती है। हरीश रावत, रह-रहकर अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे। अब नए विवाद के बाद उन्होंने खुद कांग्रेस की कार्यकारी समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य और प्रदेश कार्यकारिणी के पदों से इस्तीफा दे दिया है।

ईडी वाला एंगल क्या है?

ED के मुताबिक जीना के घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना, 13 सिक्के और 7 चेन, रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसो और कैसियो एडिफिस जैसे 12 लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं। एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज कर दिए हैं और जांच के लिए उनका मोबाइल फोन भी जब्त किया है।

10 सितंबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) 2002 के तहत देहरादून में कई ठिकानों ED ने छापेमारी की। इसमें UKSSSC के तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक, OMR शीट की प्रोसेसिंग करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित बिचौलियों के घर शामिल थे। इसी क्रम में जीना के घर भी तलाशी ली गई।

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एजेंसी के मुताबिक यह मामला उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो की चार अलग-अलग एफआईआर से जुड़ा है, जो 2016 में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर दर्ज की गई थीं। ED का आरोप है कि सुरक्षित रखी गई OMR उत्तर पुस्तिकाओं को आयोग के तत्कालीन सचिव के घर ले जाया गया, जहां कम भरे गए उत्तर पत्रकों के रोल नंबर नोट कर एक निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए गए। इन कर्मचारियों ने पैसे लेकर उत्तर पत्रकों के गोले गलत तरीके से भरे और फिर उन्हें दोबारा सील कर दिया गया।

चंदन सिंह जीना कौन हैं?

चंदन सिंह जीना फिलहाल हरीश रावत के निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे हैं। इससे पहले जब रावत 2014 से 2017 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे, तब जीना उनके विशेष ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर काम कर चुके हैं।

हरीश रावत ने क्या कहा है?

X पर एक लंबी पोस्ट में हरीश रावत ने जीना के साथ अपने जुड़ाव को स्वीकार किया लेकिन कहा कि उन्हें उन पर लगे आरोपों पर यकीन करना मुश्किल लग रहा है। उन्होंने कहा कि टीवी पर खबरें दिखाई जा रही हैं कि उनके पीए के देहरादून स्थित घर से भारी मात्रा में नकदी और गहने मिले हैं, लेकिन इसकी सच्चाई आने वाले दिनों में सामने आएगी।

हरीश रावत ने चंदन सिंह जीना को एक बेहद शालीन, विनम्र और मेहनती इंसान बताया। उन्होंने कहा कि अगर ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में चंदन जीना ने OMR शीट में छेड़छाड़ की है और इसका सबूत है तो उन्हें इस पर शर्म आएगी। उन्होंने कहा कि वह इस आरोप पर बिल्कुल भी यकीन नहीं करते।

रावत ने UKSSSC को लेकर भी सफाई दी और कहा कि यह आयोग उत्तराखंड के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 42,000 से ज्यादा सरकारी पद भरे गए थे और परीक्षाएं समय पर कराने के लिए लोक सेवा आयोग पर दबाव डाला गया था।

उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में उनसे कोई गलती हुई हो तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगते हैं। उन्होंने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि यह नियुक्ति उनकी पिछली सेवा के रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने कार्रवाई भी की थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) बीसी खंडूरी का भी जिक्र किया, जिन्होंने इस नियुक्ति को लेकर उन्हें सलाह दी थी।

हरीश रावत ने कहा कि अगर भर्ती और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से जुड़ी उनकी कोई गलती जान-बूझकर या अनजाने में हुई हो, तो वे इसके लिए सजा के हकदार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर उनके पास भर्ती प्रक्रिया में हरीश रावत की संलिप्तता का कोई सबूत है तो वे इसे CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंप सकते हैं।

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SSSC विवाद और ‘एरर ऑफ जजमेंट’ पर खेद

हरीश रावत ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (SSSC) से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। अपने लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके समय में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न क्षेत्रों में भर्ती बोर्डों का गठन हुआ। उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां की गईं। उन्होंने यह भी बताया कि SSSC के अध्यक्ष की नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और शिकायत मिलने पर उन्होंने संबंधित व्यक्ति को पद से हटा दिया था या इस्तीफा मांगा था।

रावत ने कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य के आचरण का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यदि नियुक्तियों या परीक्षाओं की प्रक्रिया के दौरान उनसे कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ हुआ है, तो वे इसके लिए उत्तराखंड के लोगों से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ी के भविष्य से खिलवाड़ है। यदि उनसे जाने-अनजाने में ऐसा कोई कृत्य हुआ है, जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, तो वे खुद को इसके लिए दंड का पात्र मानते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि SSSC अध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी से भी सलाह मिली थी।

हरीश रावत ने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्तियों के मामलों में उनकी संलिप्तता या हस्तक्षेप के कोई प्रमाण हैं, तो उन्हें सीबीआई, ईडी अथवा राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई चूक हुई है, तो कानून के अनुसार उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। रावत ने अपने बयान में सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण दायित्व संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रलोभनों से बचने और नियुक्तियों एवं परीक्षाओं की पारदर्शिता से कोई समझौता न करने की सलाह भी दी।

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