Darbhanga News: प्रभास रंजन दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में भीड़ के गुस्से और अफवाहों का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लहेरियासराय के वीआईपी रोड पर चलती पिकअप से सामान चोरी करने के आरोप में एक युवक को स्थानीय लोगों ने बेरहमी से पीटा। उसे पकड़कर दोनों पैर बांध दिए गए और पुलिस के हवाले कर दिया गया। हालांकि, पुलिस जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया, जिससे पता चला कि कोई चोरी हुई ही नहीं थी।
पिकअप से चोरी का आरोप, भीड़ का इंसाफ
घटना लहेरियासराय थाना क्षेत्र के वीआईपी रोड की है। एक पिकअप चलती हुई जा रही थी, जिसमें एयरटेल कंपनी के सिम बॉक्स समेत कई तरह का सामान लदा हुआ था। यह पिकअप दरभंगा, मधुबनी और सुपौल जा रही थी। इसी बीच, किसी ऑटो वाले ने पिकअप चालक को बताया कि कोई व्यक्ति चलती गाड़ी से कार्टून उतार रहा है। यह सुनते ही पिकअप चालक ने गाड़ी रोकी।
स्थानीय लोगों की मदद से कथित चोर को पकड़ लिया गया। भीड़ इतनी गुस्से में थी कि युवक की जमकर पिटाई की गई। उसे पुलिस के आने तक दोनों पैर बांधकर रखा गया। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस की जांच में सामने आई सच्चाई
डायल 112 के प्रभारी उदय कुमार यादव ने पिकअप चालक और पकड़े गए युवक को लहेरियासराय थाना के हवाले कर दिया। लेकिन थाने में थानाध्यक्ष चंद्रकांत गौरी ने जो खुलासा किया, वह हैरान करने वाला था। थानाध्यक्ष गौरी ने स्पष्ट किया कि पिकअप से कोई भी सामान चोरी नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा यह अफवाह फैला दी गई थी कि कार्टून निकाल लिए गए हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।
“पिकअप वाले का कोई सामान चोरी नहीं हुआ था। लोगों के द्वारा अफवाह फैला दिया गया था की कार्टून निकाल लिया है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।”
— चंद्रकांत गौरी, थानाध्यक्ष, लहेरियासराय
जांच में स्पष्ट होने के बाद, पकड़े गए युवक को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर अफवाहों के आधार पर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने के गंभीर परिणामों को उजागर किया है।
अफवाहों पर आधारित ‘भीड़ का न्याय’ कितना घातक?
यह घटना दिखाती है कि कैसे गलत सूचना या अफवाहें गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं। एक छोटी सी गलतफहमी ने एक युवक को भीड़ की हिंसा का शिकार बना दिया। सौभाग्य से, पुलिस की त्वरित और निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ गई और एक व्यक्ति को बेवजह की परेशानी से मुक्ति मिली। यह जरूरी है कि लोग किसी भी जानकारी की पुष्टि किए बिना उस पर प्रतिक्रिया न दें, ताकि ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण वाकये दोबारा न हों।







