Bihar Flood Relief: बिहार में बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने 579.23 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर 8 लाख 27 हजार 472 प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में 7-7 हजार रुपये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि कोई भी पात्र परिवार इस राहत से वंचित न रहे।
इसके साथ ही, दुर्गापूजा से पहले बाढ़ प्रभावित इलाकों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए तेजी से काम करने को कहा गया है। सरकार ने सड़कों, बांधों और अन्य क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत जल्द से जल्द पूरी करने का भी निर्देश दिया है ताकि जनजीवन पटरी पर लौट सके।
बाढ़ पीड़ितों के लिए 579 करोड़ की सहायता जारी
सरकार को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष बिहार के 15 जिलों में बाढ़ का व्यापक असर देखा गया है। इन जिलों के 88 प्रखंडों और 575 पंचायतों के 2,642 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। इसके अलावा, 21 शहरों के कई वार्डों में भी जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाढ़ के दौरान प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों के लिए 21 टीमें तैनात की थीं। प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए 1,200 से अधिक सामुदायिक रसोई भी चलाई गईं, जिनके माध्यम से हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राहत का काम केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जब तक घरों और खेतों से पानी पूरी तरह नहीं निकल जाता, तब तक राहत शिविर और सामुदायिक सहायता जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दुर्गापूजा से पहले सामान्य होगी स्थिति
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती अब प्रभावित इलाकों को सामान्य स्थिति में लाना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने की संभावित समय-सीमा के बारे में पूछा। अधिकारियों ने दुर्गापूजा से पहले अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकलने की उम्मीद जताई है।
मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही अगले एक महीने में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत पूरी करने का भी निर्देश दिया। जिन इलाकों में सड़कें खराब हुई हैं, वहां तेजी से काम करने को कहा गया है। बांधों और दूसरी जरूरी संरचनाओं की मरम्मत से बाढ़ प्रभावित गांवों और शहरों की आवाजाही पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा। सड़क और संपर्क व्यवस्था बहाल होने से राहत सामग्री पहुंचाने तथा लोगों के सामान्य जीवन को पटरी पर लाने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राहत वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “कोई भी पात्र परिवार राहत से छूटना नहीं चाहिए। दुर्गापूजा से पहले बाढ़ प्रभावित इलाकों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए तेजी से काम करें।”
छूटे हुए परिवारों को 7 दिन में मिलेगी राहत
सरकार ने राहत वितरण से छूटे हुए पात्र परिवारों के लिए भी समय सीमा तय कर दी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे परिवारों की पहचान और नुकसान का आकलन किया जाए। इसके बाद, सात दिनों के भीतर उन्हें भी 7 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाए।
गरीब परिवारों को हुए नुकसान का सर्वे कराने का भी निर्देश दिया गया है। सर्वे के आधार पर जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त राहत पहुंचाने की बात कही गई है। इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राहत सूची में किसी पात्र परिवार का नाम छूटने की स्थिति में उसे लंबे समय तक सहायता का इंतजार न करना पड़े।
केंद्रीय टीम करेगी नुकसान का आकलन
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम के बिहार आने की जानकारी भी दी गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्तर पर इस संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार रखने को कहा गया है, जिसमें बाढ़ से हुए नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी शामिल होगी। केंद्रीय टीम के आकलन के बाद आगे की राहत और सहायता से जुड़ी प्रक्रिया में मदद मिल सकती है।
सामान्य से कम बारिश, फिर भी क्यों आई बाढ़?
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार बिहार में बारिश सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम रही, इसके बावजूद कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी। सरकार अब इस स्थिति के कारणों पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने भविष्य में बिहार को बाढ़ के खतरे से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए तैयारी करने की बात कही है। इसके लिए बाढ़ नियंत्रण और प्रभावित इलाकों की सुरक्षा से जुड़े उपायों पर काम करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना, पानी निकालना और क्षतिग्रस्त ढांचे को जल्द बहाल करना है। प्रशासन के सामने दुर्गापूजा से पहले अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लाने का लक्ष्य रखा गया है।








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