Bihar UCC: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर मतभेद गहरे हो गए हैं। जहां एक ओर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस पर खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया है, वहीं गठबंधन के अन्य प्रमुख सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई सीधा विरोध नहीं जताया है। इस स्थिति से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, खासकर तब जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उत्तर-प्रदेश चुनाव के बाद UCC पर कोई बड़ा फैसला लेने की संभावना जताई जा रही है।
जदयू का कड़ा रुख: नीतीश कुमार का पुराना स्टैंड
जदयू ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने याद दिलाया है कि नीतीश कुमार ने पहले ही विधि आयोग को पत्र लिखकर साफ किया था कि जदयू किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के पक्ष में नहीं है। पटना में पार्टी ने इस मसले पर अपना खुला विरोध दर्ज कराया है, जो एनडीए के भीतर एक अलग राह दिखाता है।
चिराग पासवान की शर्त: विविधता और सहमति पर जोर
एनडीए के महत्वपूर्ण सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने UCC पर अपनी राय सधी हुई रखी है। उन्होंने कहा है कि भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है और हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं एवं रीति-रिवाज हैं। चिराग पासवान ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि पांचवीं-छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371ए, 371जी और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है।
चिराग पासवान ने कहा, “पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो, तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”
हम और आरएलएम का सधा हुआ बयान
जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ के अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी UCC पर सीधा विरोध नहीं किया है, लेकिन संवाद की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि गठबंधन के सभी सहयोगियों के साथ चर्चा और आपसी सहमति के बाद ही समान नागरिक संहिता को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने इस तीखी बहस पर फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कूटनीतिक दूरी बनाए रखी है।
एनडीए के भीतर UCC पर यह भिन्न-भिन्न राय आने वाले समय में बिहार की राजनीति में नई करवट ले सकती है। उत्तर-प्रदेश चुनाव के बाद केंद्र सरकार के किसी भी कदम पर बिहार के इन सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।







