Bihar Paperless Registry: बिहार की राजधानी पटना में जमीन और मकान की रजिस्ट्री के लिए लागू की गई पेपरलेस व्यवस्था ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इस नई प्रणाली के कारण दस्तावेजों के निबंधन की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को फॉर्म भरने और तकनीकी प्रक्रिया समझने में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
पटना सदर निबंधन कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, 17 अगस्त से 17 सितंबर के बीच इस साल करीब 800 दस्तावेजों की ही रजिस्ट्री हो पाई है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि के दौरान 1620 दस्तावेजों का निबंधन हुआ था। इस तरह, एक महीने की अवधि में रजिस्ट्री की संख्या लगभग आधी रह गई है।
क्यों घट गई रजिस्ट्री की संख्या?
17 अगस्त से शुरू हुई पेपरलेस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करके ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देना था। हालांकि, नई प्रणाली की तकनीकी जानकारी के अभाव में लोगों को फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेजों के निबंधन तक में दिक्कत हो रही है। ऑनलाइन प्रक्रिया से अपरिचित लोग रजिस्ट्री कराने में अधिक परेशानी महसूस कर रहे हैं।
जमीन की खरीद-बिक्री के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग निबंधन कार्यालय पहुंचते हैं। उन्हें ऑनलाइन फॉर्म भरने और प्रक्रिया समझने में विशेष रूप से कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पहले वे दस्तावेज तैयार कराने और फॉर्म भरने के लिए कातिबों की मदद लेते थे, लेकिन अब यह सुविधा भी कम हो गई है।
कातिबों की हड़ताल से और बढ़ी मुश्किलें
पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में कातिबों की हड़ताल ने भी रजिस्ट्री प्रक्रिया को प्रभावित किया है। कातिबों की मदद नहीं मिलने के कारण, जो लोग खुद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ हैं, उन्हें अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस वजह से भी निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों की संख्या प्रभावित हुई है।
शुरुआती दिनों में शून्य रही रजिस्ट्री
जानकारों ने बताया कि 17 अगस्त को पेपरलेस व्यवस्था शुरू होने के बाद शुरुआती दो दिनों में पटना सदर निबंधन कार्यालय में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई थी। इसके बाद, एक सप्ताह के दौरान केवल करीब दो दर्जन दस्तावेजों का ही निबंधन हो पाया। इनमें वे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक करा लिया था।
वर्तमान में पेपरलेस व्यवस्था के तहत पटना सदर निबंधन कार्यालय में रोजाना औसतन 28 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो रही है। इसकी तुलना में, पुरानी व्यवस्था में सामान्य दिनों में रोजाना 60 से 80 दस्तावेजों का निबंधन होता था, और शादी-ब्याह के मौसम में यह संख्या 100 से भी अधिक पहुंच जाती थी।
सरकार के राजस्व पर भी असर
दस्तावेजों की रजिस्ट्री की संख्या में कमी आने का सीधा असर सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ रहा है। जमीन और मकान के निबंधन से सरकार को स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क के रूप में आय होती है। रजिस्ट्री की संख्या घटने से इस मद में राजस्व संग्रह भी प्रभावित हुआ है, जिससे सरकारी खजाने को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तकनीकी जानकारी का अभाव और नई प्रक्रिया को समझने में लगने वाला समय इस चुनौती को और बढ़ा रहा है। लोगों को डिजिटल साक्षर बनाने और प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि यह महत्वपूर्ण व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।







