Bihar Education Corruption: बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार हुआ है। आय से 72.35% अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों में सहरसा में तैनात जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजित अमर को निलंबित कर दिया गया है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की छापेमारी में इस भ्रष्ट अधिकारी की साढ़े चार साल की नौकरी में करोड़ों की अवैध संपत्ति का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने यह बड़ा एक्शन लिया है।
साढ़े चार साल की नौकरी, करोड़ों की काली कमाई
शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन ने 29 सितंबर को अजित अमर के निलंबन का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी द्वारा 7 अगस्त को दी गई जानकारी के आधार पर हुई। ईओयू ने 5 अगस्त 2026 को अजित अमर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। इसके बाद डीपीओ के सीवान, सारण और सहरसा स्थित चार ठिकानों पर सघन छापेमारी की गई, जिससे उनकी अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ।
सहरसा में तैनात शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजित अमर के खिलाफ डीए केस दर्ज कर 4 ठिकानों पर छापा मारा गया। इस अधिकारी के खिलाफ आय से 72.35 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। लिहाजा अजित अमर को सस्पेंड किया जाता है।
जांच में सामने आया कि फरवरी 2022 में सेवा में आने के बाद अजित अमर ने लगभग साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में मात्र 38 लाख रुपये वेतन के रूप में प्राप्त किए। इसके बावजूद उन्होंने बेहिसाब चल-अचल संपत्ति खड़ी कर ली।
किन ठिकानों पर हुई छापेमारी और क्या मिला?
ईओयू की टीम ने सीवान के दारौंदा थाना अंतर्गत रैनी स्थित पैतृक मकान, सहरसा के नया बाजार स्थित किराये का आवास, सहरसा स्थित सरकारी कार्यालय कक्ष और छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी की। इस दौरान कई चौंकाने वाले दस्तावेज और संपत्ति मिली है।
- जमीन: डीपीओ ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर सारण के एकमा में छह बीघा 9 कट्ठा 8 धूर (481.36 डिसमिल) जमीन खरीदी। दस्तावेजों में इसकी कीमत 41.50 लाख रुपये दर्ज है, लेकिन जांच एजेंसी को इससे अधिक रकम चुकाने के सबूत मिले हैं।
- आभूषण: अजित अमर के निजी आवास से 40.05 लाख रुपये के आभूषण बरामद हुए। 2023 से 2025 के बीच 27 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदने के दस्तावेज भी ईओयू के हाथ लगे हैं।
- मकान: सीवान में अपनी पैतृक जमीन पर 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से एक भव्य मकान का निर्माण कराया गया है।
- वाहन: एक महिंद्रा स्कॉर्पियो और एक यामाहा एफएच बाइक भी खरीदी गई है।
अजित अमर की पोस्टिंग सहरसा में हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें सारण (छपरा) में डीपीओ (योजना एवं लेखा) के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया। इसी दौरान उन पर भ्रष्टाचार के माध्यम से अवैध धनार्जन के आरोप लगे। स्थानीय जिला प्रशासन की जांच के बाद उन्हें वापस सहरसा भेज दिया गया था। इस निलंबन के बाद अजित अमर पर कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच जारी रहेगी, जिससे बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।







