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Bhagalpur JLNMCH भागलपुर अस्पताल में बड़ा खेल! बिना टेंडर 9 माह से चल रही जांच, मरीजों की जान से खिलवाड़

Bihar JLNMCH: जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की जांच से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। नौ महीने से निजी एजेंसी बिना अनुबंध के काम कर रही है, वहीं दूसरी एजेंसी को भी बिना स्पष्ट आदेश के जिम्मा सौंपा गया, जिससे गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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Bihar JLNMCH: हिमांशु शेखर भागलपुर। भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाओं के संचालन में गंभीर अनियमितता सामने आई है।

पुरानी एजेंसी का अनुबंध समाप्त होने पर नई निविदा जारी नहीं हुई,पारदर्शिता पर खड़े हो रहे सवाल

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अस्पताल के ओपीडी परिसर में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर चल रही इन सेवाओं के लिए निजी एजेंसी का अनुबंध नौ महीने पहले ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद, बिना किसी नई निविदा के पुरानी व्यवस्था धड़ल्ले से जारी है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Bhagalpur JLNMCH भागलपुर अस्पताल में बड़ा खेल! बिना टेंडर 9 माह से चल रही जांच, मरीजों की जान से खिलवाड़

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बिना टेंडर चल रहा काम, 9 महीने से नहीं हुई नई निविदा

अस्पताल प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली ने वित्तीय निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्वास्थ्य विभाग से सूचना मांगे जाने पर, अधीक्षक ने आधिकारिक ब्योरा दिया, जिससे पता चला कि वर्ष 2022 में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच सेवाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इसके आधार पर, एक निजी एजेंसी को 2023 से 2025 तक इन सेवाओं का संचालन करना था। हालांकि, अनुबंध की अवधि पूरी होने के बावजूद, नौ महीने बीत जाने पर भी अस्पताल स्तर पर नई निविदा जारी करने की कोई ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

अस्पताल प्रबंधन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली से पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और वित्तीय निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

दूसरी एजेंसी को भी बिना आदेश सौंपा गया जिम्मा

यह गड़बड़ी केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं है। अस्पताल के ओपीडी में महिला अल्ट्रासाउंड जांच की जिम्मेदारी वर्ष 2024 में एक अन्य दूसरी निजी एजेंसी को सौंपे जाने की बात सामने आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संवेदनशील जिम्मेदारी को किस निविदा, वर्क ऑर्डर या सक्षम प्राधिकार के लिखित आदेश के तहत सौंपा गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बिना किसी पारदर्शी आदेश के दूसरी एजेंसी को काम सौंपने की यह प्रक्रिया भी अब संदेह के घेरे में है।

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मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और प्रशासनिक लापरवाही

मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में, जब पुरानी एजेंसी का अनुबंध खत्म हुए नौ माह बीत चुके हैं, तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा नई निविदा निकालने में इतनी हीला-हवाली क्यों बरती जा रही है, यह बड़ा सवाल है।

अस्पताल के ओपीडी में महिला अल्ट्रासाउंड जांच की जिम्मेदारी बाद में वर्ष 2024 में एक अन्य दूसरी निजी एजेंसी को सौंपे जाने की बात भी सामने आई है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस दूसरी एजेंसी को यह संवेदनशील जिम्मेदारी किस विशिष्ट निविदा, वर्क ऑर्डर अथवा सक्षम प्राधिकार के किस लिखित आदेश के आधार पर दी गई। इसकी कोई स्पष्ट और ठोस जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

यह स्थिति प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही गंभीर शिथिलता और लापरवाही को उजागर करती है, जो सीधे तौर पर मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ी जांच व्यवस्था को प्रभावित करती है। यह आशंका भी गहरा रही है कि कहीं किसी निजी एजेंसी को परोक्ष लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ही नई निविदा की प्रक्रिया को लगातार टाला तो नहीं जा रहा है।

जेएलएनएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. महेश कुमार ने इस गंभीर प्रशासनिक चूक के संबंध में बताया कि “यह प्रकरण अब संज्ञान में आ चुका है और इसकी विभागीय जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के उपरांत ही वस्तुस्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी कि निविदा प्रक्रिया अब तक किन कारणों से लंबित रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”

इस पूरे मामले की गहन जांच से ही सच्चाई सामने आ पाएगी और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

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