Bhagalpur Solar Tricycle: हिमांशु शेखर भागलपुर। जीवन में जब ज़रूरत और मज़बूत हौसला मिलते हैं, तो अभावों के बीच भी नई राहें निकल आती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है भागलपुर के एक दिव्यांग युवक ने, जिसने अपनी सूझबूझ और देसी जुगाड़ से एक अनोखी ‘सोलर ट्राइसाइकिल’ बनाई है। यह ट्राइसाइकिल आजकल भागलपुर की सड़कों पर कौतूहल का केंद्र बनी हुई है, क्योंकि यह सीधे धूप से ऊर्जा लेकर चलती है और इसका खर्च लगभग शून्य है।
भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड स्थित सनोखर गांव के निवासी रहमतुल्लाह ने इस अद्भुत वाहन को तैयार किया है। उन्होंने अपनी मेधा का इस्तेमाल करते हुए कबाड़ से उपयोगी कलपुर्जे जुटाए और बहुत कम पूंजी में इसे असेंबल कर दिया। यह इनोवेशन पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और पारंपरिक मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल को घंटों चार्ज करने की झंझट से मुक्ति दिलाता है।
धूप से रफ्तार, गर्मी से राहत: क्या है इस ट्राइसाइकिल की खासियत?
रहमतुल्लाह द्वारा बनाई गई इस ट्राइसाइकिल की सबसे बड़ी खूबी इसकी छत पर लगे दो सोलर पैनल हैं। ये पैनल न केवल दिन के उजाले में सौर ऊर्जा सोखकर गाड़ी को गति देते हैं, बल्कि भीषण गर्मी में चालक को धूप से बचाने के लिए शेड का काम भी करते हैं। चालक को पसीने से राहत देने के लिए इसमें एक छोटा पंखा भी लगा है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से ही संचालित होता है।
शहर के व्यस्त कचहरी चौक से जब यह ट्राइसाइकिल गुजरी, तो राहगीरों और वाहन चालकों ने रुककर इसे निहारा। सभी ने रहमतुल्लाह के इस अनूठे प्रयास की जमकर सराहना की। रहमतुल्लाह ने बताया कि सामान्य इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल की सीमित रेंज और बिजली बिल की चिंता ने उन्हें सौर ऊर्जा आधारित विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया।
कैसे काम करती है ‘जीरो खर्च’ वाली सोलर ट्राइसाइकिल?
रहमतुल्लाह की आर्थिक तंगी ने उन्हें कबाड़ से चीजें इकट्ठा करने पर मजबूर किया, जिसके परिणामस्वरूप यह किफायती और पर्यावरण-अनुकूल वाहन तैयार हुआ। उन्होंने ट्राइसाइकिल पर लगभग 100 वॉट का सोलर पैनल फिट किया है। यह पैनल धूप के संपर्क में आते ही एक छोटी रिचार्जेबल बैटरी को चार्ज करना शुरू कर देता है। इस व्यवस्था के चलते ट्राइसाइकिल दिनभर धूप में बिना रुके चलती रहती है और इसका रनिंग खर्च लगभग शून्य है।
यह देसी आविष्कार पर्यावरण संरक्षण और ‘ग्रीन मोबिलिटी’ के दृष्टिकोण से बेहद प्रेरणादायक है। इससे न तो कोई हानिकारक धुआं निकलता है और न ही ध्वनि प्रदूषण होता है। यह मॉडल प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सौर मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती देता है, यह दर्शाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति किसी भी बाधा से बड़ी होती है।
भविष्य की संभावनाएं और सरकारी सहयोग की अपील
स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस प्रोटोटाइप को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, तकनीकी संस्थानों या सामाजिक संगठनों का सहयोग मिले, तो इसके संतुलन और चेसिस की मजबूती को और बेहतर बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस मॉडल को बड़े पैमाने पर दिव्यांगजनों के लिए एक मुकम्मल और किफायती साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे हजारों लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।







