दरभंगा में बड़ा एक्शन! NGT ने नगर आयुक्त को समन भेजा, मोइन पोखर पर सख्त आदेश
Darbhanga Pokhar: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 150 एकड़ से अधिक के मोइन पोखर के सीमांकन में देरी पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने दरभंगा नगर निगम के आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
Darbhanga Pokhar: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पूर्वी जोन, कोलकाता ने हाल ही में ‘तालाब बचाओ अभियान बनाम बिहार सरकार’ मामले की सुनवाई करते हुए दरभंगा नगर निगम के नगर आयुक्त के खिलाफ सख्त आदेश जारी किया है।
‘तालाब बचाओ अभियान’ के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बताया कि यह आदेश अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अदालत ने मोइन पोखर के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने में हुई देरी पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। NGT ने नगर आयुक्त को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
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150 एकड़ के मोइन पोखर पर NGT का बड़ा एक्शन! नगर आयुक्त को सीधे कोर्ट में बुलाया
Darbhanga Moin Pokhar: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पूर्वी जोन, कोलकाता ने दरभंगा के मोइन पोखर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नगर निगम के आयुक्त के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ‘तालाब बचाओ अभियान बनाम बिहार सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर आयुक्त द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। इस मामले में कोर्ट ने दरभंगा नगर आयुक्त को अगली सुनवाई की तारीख 30 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर आयुक्त को पुराने रेवेन्यू रिकॉर्ड्स, अतिक्रमण से संबंधित सभी जानकारी और मोइन पोखर के डिमार्केशन (सीमांकन) से संबंधित अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर देना होगा। यह आदेश दर्शाता है कि NGT इस प्राकृतिक वेटलैंड के संरक्षण को लेकर गंभीर है और अधिकारियों की निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं करेगा।
मोइन पोखर का महत्व और पूर्व के आदेश
मोइन पोखर नदी से निर्मित एक प्राकृतिक वेटलैंड है, जो 150 एकड़ से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। यह पोखर दरभंगा सदर और बहादुरपुर अंचल में आता है। दरभंगा सदर अंचल में इसके रकबे काजीपुरा, महेशपट्टी, बेलवागंज, चकजोहरा और असफुनदयालपुर मौजा में हैं, जबकि बहादुरपुर अंचल में यह याकूबपुर मौजा तक फैला है। पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए इसका महत्व बहुत अधिक है।
साल 2025 में माननीय NGT ने मोइन पोखर के रकबे का सीमांकन करने और इसे अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया था। हालांकि, ‘तालाब बचाओ अभियान’ के अधिवक्ताओं श्री कमलेश कुमार मिश्र और रेणु जी के अनुसार, आज तक मोइन पोखर के एक भी मौजा का सीमांकन नहीं किया गया है। इसी बात से नाराज होकर न्यायालय ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर जवाब देने का कड़ा आदेश दिया है।
नगर निगम प्रशासन की ओर से मोइन पोखर के सीमांकन में लगातार हो रही देरी और अतिक्रमण हटाने में बरती जा रही लापरवाही पर NGT का यह फैसला महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में नगर आयुक्त को न केवल अपनी कार्रवाई का ब्योरा देना होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि पूर्व के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने इस फैसले का स्वागत किया है, जिससे मोइन पोखर के संरक्षण की उम्मीदें बढ़ी हैं।
माननीय न्यायालय ने 2025 में मन पोखर के रकबा का सीमांकन करने एवं इसको अतिक्रमणमुक्त करने के लिए आदेश दिया था। आज तक मन पोखर के एक भी मौजा का सीमांकन नहीं किया गया है। इसी बात से नाराज होकर माननीय न्यायालय ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर जवाब देने के लिए कड़ा आदेश दिया है।
यह मामला दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक संस्थाएं लगातार सक्रिय हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा। 30 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी, जब नगर आयुक्त को NGT के सामने अपनी कार्रवाई का हिसाब देना होगा।
मोइन पोखर पर NGT की सख्ती क्यों?
मामला ओ. ए. नंबर 14/2014 से संबंधित है, जिसमें दरभंगा के मोइन पोखर को बचाने के लिए ‘तालाब बचाओ अभियान’ ने याचिका दायर की थी। माननीय न्यायालय ने 2025 में मोइन पोखर के रकबा का सीमांकन करने और इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने का आदेश दिया था। हालांकि, ‘तालाब बचाओ अभियान’ से जुड़े अधिवक्ता श्री कमलेश कुमार मिश्र और रेणु जी ने बताया कि आज तक मोइन पोखर के एक भी मौजा का सीमांकन नहीं किया गया है। इसी लापरवाही पर NGT ने कड़ी नाराजगी जताई है और नगर आयुक्त को तलब किया है।
मोइन पोखर नदी निर्मित एक प्राकृतिक वेटलैंड है, जिसका क्षेत्रफल डेढ़ सौ एकड़ से भी अधिक है। यह विशाल पोखर दरभंगा सदर और बहादुरपुर अंचल में फैला हुआ है, जो इस क्षेत्र के पर्यावरण और जल संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दरभंगा सदर के काजीपुरा, महेशपट्टी, बेलवागंज, चकजोहरा और असफुनदयालपुर मौजा में इसका विस्तार है, जबकि बहादुरपुर अंचल में याकूबपुर मौजा भी इसके अंतर्गत आता है। इस प्राकृतिक वेटलैंड का संरक्षण स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद जरूरी है।
अगली सुनवाई में क्या होगा?
NGT ने नगर आयुक्त, दरभंगा को स्पष्ट आदेश दिया है कि अगली सुनवाई की तारीख 30 अक्टूबर 2026 को वे स्वयं न्यायालय में उपस्थित हों। उन्हें पुराने रेवेन्यू रिकॉर्ड्स, मोइन पोखर पर अतिक्रमण से संबंधित जानकारी और इसके सीमांकन के लिए अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। ‘तालाब बचाओ अभियान’ के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बताया कि यह आदेश अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस मामले में NGT का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि पर्यावरणीय लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता से करना होगा।
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