Bihar Corruption Raid: सितंबर माह में बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान चला। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance) ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की। इस दौरान एक ही महीने में 6 अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। इन छापों में कुल मिलाकर लगभग 9 करोड़ 38 लाख रुपये की बेनामी संपत्ति का आरोप सामने आया है, जिसमें बड़ी मात्रा में नकदी, आभूषण और अचल संपत्तियों के दस्तावेज शामिल हैं।
इन कार्रवाइयों से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की यह मुहिम जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
आय से अधिक संपत्ति: किस अधिकारी पर क्या आरोप?
सितंबर में हुई इन बड़ी Bihar Corruption Raid में कुल छह अधिकारी जांच के घेरे में आए। इनमें दरभंगा के एक बीडीओ, पूर्णिया के अधीक्षण अभियंता, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम के महाप्रबंधक, पटना के एडीएम और उनकी पत्नी जो दानापुर की अवर निबंधक हैं, साथ ही परिवहन विभाग के एक प्रवर्तन अवर निरीक्षक शामिल हैं। आर्थिक अपराध इकाई ने तीन अधिकारियों पर शिकंजा कसा, जबकि निगरानी ब्यूरो ने तीन अन्य के खिलाफ कार्रवाई की।
- आनंद कुमार विभूति (BDO, बहादुरपुर, दरभंगा): उन पर ज्ञात आय से करीब 1 करोड़ 71 लाख रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है, जो उनकी आय का 121 प्रतिशत है।
- सत्येंद्र कुमार चौधरी (अधीक्षण अभियंता, भवन निर्माण विभाग, पूर्णिया): प्रारंभिक जांच में लगभग 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार रुपये की ऐसी संपत्ति मिली, जिसका उनकी ज्ञात आय से मेल नहीं खाता।
- कमलेश कुमार (महाप्रबंधक, तकनीकी, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड): उन पर अपनी ज्ञात आय से करीब 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये अधिक की संपत्ति बनाने का आरोप है, जो आय का 103.30 प्रतिशत है।
- रविंद्र कुमार दिवाकर (ADM, सप्लाई, पटना) और कुमारी स्वीटी (जिला अवर निबंधक, दानापुर): पति-पत्नी के संयुक्त मामले में ज्ञात आय और संपत्ति के बीच लगभग 1 करोड़ 6 लाख 85 हजार 900 रुपये का बड़ा अंतर पाया गया।
- अमित कुमार गुप्ता (प्रवर्तन अवर निरीक्षक, परिवहन विभाग, कैमूर): उन पर अपनी ज्ञात आय से करीब 1 करोड़ 49 लाख 58 हजार 500 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है, जो आय का 148 प्रतिशत है।
किसके ठिकानों से क्या-क्या मिला? पूरी लिस्ट
जांच एजेंसियों की छापेमारी में अधिकारियों के ठिकानों से जमीन, मकान, फ्लैट, बैंक खाते, निवेश, आभूषण और नकदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। कई मामलों में बड़ी रकम फ्रीज भी की गई।
| अधिकारी का नाम | विभाग/पद | छापेमारी की तारीख | बरामदगी का विवरण |
|---|---|---|---|
| आनंद कुमार विभूति | BDO, बहादुरपुर, दरभंगा | 8 सितंबर | 16 भूखंडों के कागजात, 70 लाख रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी, पूर्वी चंपारण में 70 लाख का मकान। |
| सत्येंद्र कुमार चौधरी | अधीक्षण अभियंता, भवन निर्माण विभाग, पूर्णिया | 16 सितंबर | पटना में बहुमंजिला मकान (लिफ्ट, सोलर पैनल सहित), पूर्णिया व अन्य स्थानों पर जमीन, बैंक खाते, निवेश संबंधी दस्तावेज। |
| कमलेश कुमार | महाप्रबंधक, तकनीकी, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लि. | 22 सितंबर | 4 करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य की 12 अचल संपत्तियों के कागजात, 16 बैंक खातों में 25 लाख 86 हजार रुपये फ्रीज, आभूषण व लग्जरी वाहन संबंधी दस्तावेज। |
| रविंद्र कुमार दिवाकर व कुमारी स्वीटी | ADM (सप्लाई) पटना व जिला अवर निबंधक, दानापुर | 28 सितंबर | 79-80 लाख रुपये नकद, 52 लाख 60 हजार रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, 6 लाख रुपये की 48 महंगी घड़ियां, 2 करोड़ 92 लाख रुपये मूल्य की 7 अचल संपत्तियों के कागजात। |
| अमित कुमार गुप्ता | प्रवर्तन अवर निरीक्षक, परिवहन विभाग, कैमूर | 30 सितंबर | 3 लाख रुपये नकद, एक इलेक्ट्रिक कार (टाटा टिगोर), आरा, पटना व छपरा में 11 भूखंडों के दस्तावेज, अवधपुरी में G+3 मकान, आरा में 5.1 डिसमिल जमीन पर निर्माणाधीन मकान, पटना के साई वरदान सिटी में फ्लैट के दस्तावेज। |
ये बरामदगियां अधिकारियों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति की पुष्टि करती हैं। जांच अभी जारी है और कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
कुल 10 करोड़ की अवैध संपत्ति, सबसे ज्यादा कैश किसके पास?
सितंबर माह में हुई इन पांच कार्रवाइयों में कुल छह अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप सामने आए हैं। एजेंसियों द्वारा बताए गए आंकड़ों को जोड़ने पर यह रकम करीब 9 करोड़ 38 लाख रुपये बैठती है। सबसे बड़ा आरोपित आंकड़ा कमलेश कुमार के मामले में है, जहां 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आरोप है। इसके बाद सत्येंद्र कुमार चौधरी और आनंद कुमार विभूति के मामले आते हैं।
नकद बरामदगी के मामले में रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी सबसे आगे रहे। उनके पटना और बेगूसराय स्थित ठिकानों से लगभग 79 से 80 लाख रुपये नकद मिले। इसी मामले में 52 लाख 60 हजार रुपये के आभूषण और 48 महंगी घड़ियां भी बरामद हुईं। कमलेश कुमार के 16 बैंक खातों में लगभग 25 लाख 86 हजार रुपये फ्रीज किए गए, जबकि अमित कुमार गुप्ता के यहां से 3 लाख रुपये नकद जब्त हुए।
EOU के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमारी टीमें लगातार भ्रष्टाचार पर नजर रख रही हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई एक संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।’
ये सभी आंकड़े जांच में सामने आए आरोपों और शुरुआती बरामदगी पर आधारित हैं। इन्हें अदालत से अंतिम रूप से साबित अपराध या जब्त संपत्ति नहीं माना जा सकता। हालांकि, इन छापों ने सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में इन मामलों में और भी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद है।







