Adhir Ranjan Chowdhury: कोलकाता में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ममता से अपने सभी बचे हुए विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में वापस आने की अपील की है। हालांकि, इस न्योते के साथ एक तीखी शर्त भी जुड़ी है, जिसे लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
चौधरी ने ममता बनर्जी से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्हें अपना ‘सामान’ पीछे छोड़ना होगा। इस ‘सामान’ शब्द को ममता के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सीधा तंज माना जा रहा है। दिल्ली में इंडी गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी के शामिल होने के ठीक एक दिन बाद, गुरुवार को चौधरी ने यह बयान दिया, जिसने गठबंधन के भीतर की दरारों को उजागर कर दिया है।
‘अलग पार्टी की जरूरत नहीं, कांग्रेस में लौटें’
अधीर रंजन चौधरी ने साफ तौर पर कहा कि इस समय किसी अलग पार्टी की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के पास ज्यादा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने ममता बनर्जी से अपील की कि वे अपने सभी शेष विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाएं।
“मैं ममता बनर्जी से अपील करता हूं कि वह सभी बचे हुए विधायकों और सांसदों के साथ कांग्रेस में शामिल हो जाएं। मैं कांग्रेस आलाकमान से भी अपील करूंगा कि उन्हें पार्टी में वापस लिया जाए और बंगाल में कांग्रेस उनका नेतृत्व स्वीकार कर उनके अधीन काम करने को तैयार है।”
कांग्रेस नेता ने पार्टी आलाकमान से भी इस संभावित विलय की राह को आसान बनाने का आग्रह किया। उन्होंने सहयोग की भावना का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह ममता ने 6 अक्टूबर को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया है, उसी तरह उन्हें रेजीनगर में भी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए। चौधरी ने जोर देकर कहा कि जब ममता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन की शरण ली है, तो उन्हें अपनी मूल पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी के बिना कोई फैसला नहीं: सौगत रॉय
दूसरी ओर, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने अधीर रंजन चौधरी के इस प्रस्ताव पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर तभी विचार करेगी, जब वह कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से आधिकारिक रूप से आएगा। रॉय ने कहा कि चौधरी ने वही कहा जो उन्हें लगा, लेकिन अब तृणमूल कांग्रेस एक अलग पार्टी है और इंडी गठबंधन का एक अहम हिस्सा भी है।
चौधरी की ‘बैगेज’ वाली टिप्पणी पर सौगत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी से जुड़ा कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेता और राष्ट्रीय महासचिव हैं, और उनकी भूमिका निर्विवाद है।
1998 में कांग्रेस से अलग हुई थीं ममता
यह गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस पार्टी से अलग होकर अपनी खुद की पार्टी, तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। अधीर रंजन चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडी गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने की रणनीति बना रहा है, लेकिन सहयोगी दलों के बीच आंतरिक खींचतान और बयानबाजी लगातार सामने आ रही है।







