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बिहार में फिर टूटने की कगार पर महागठबंधन? कांग्रेस ने RJD के खिलाफ उतारे 4 उम्मीदवार | DARBHANGA से फिर मदन मोहन झा को मौका – देखें ‘फ्रेंडली फाइट’ की पूरी लिस्ट

Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और राजद के बीच चार सीटों पर सीधा मुकाबला होगा। यह 'दोस्ताना जंग' पिछले विधानसभा चुनाव की याद दिलाती है, जब एनडीए को इसका सीधा फायदा मिला था।

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Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन के भीतर छिड़ी ‘फ्रेंडली फाइट’ ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस ने लालू और तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के खिलाफ चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे दोनों सहयोगी दलों के बीच तल्खी साफ दिख रही है। यह स्थिति पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव की याद दिलाती है, जब ऐसी ही आंतरिक कलह का सीधा फायदा एनडीए को मिला था।

पार्टी ने दरभंगा शिक्षक, कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक, पटना शिक्षक और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए प्रत्याशी तय किए हैं। पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. मदन मोहन झा, कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक, पटना शिक्षक से डॉ. संजय यादव और पटना स्नातक से डॉ. असदुल्लाह खान को उम्मीदवार बनाया गया है।

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कांग्रेस ने गुरुवार देर रात बिहार की कुल पांच एमएलसी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। इनमें से चार सीटें ऐसी हैं, जिन पर राजद पहले ही प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। दरभंगा शिक्षक सीट से मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को कांग्रेस ने फिर से मौका दिया है। इस सीट पर राजद ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, और झा का मुकाबला जेडीयू के घनश्याम राय और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के एसपी राय से होगा। मदन मोहन झा बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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किन सीटों पर आमने-सामने कांग्रेस और राजद?

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी राजद और कांग्रेस के बीच विधान परिषद चुनाव में इन चार सीटों पर सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा:

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सीट का नाम कांग्रेस उम्मीदवार राजद उम्मीदवार
पटना शिक्षक संजय यादव संजीव कुमार सिंह
पटना स्नातक असदुल्लाह खान दिलीप कुमार
कोसी स्नातक मनोज कुमार जायसवाल नितेश कुमार
दरभंगा स्नातक रजनीकांत पाठक अनिल कुमार झा
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इन सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है, जिससे महागठबंधन की एकता पर सवाल उठ रहे हैं।

महागठबंधन में क्यों आई ‘फ्रेंडली फाइट’ की नौबत?

बताया जा रहा है कि बिहार विधान परिषद की कुल 8 सीटों पर होने जा रहे चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर कोई बातचीत नहीं हुई। तेजस्वी यादव की पार्टी राजद ने 11 सितंबर को ही 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी, जो बिहार में एमएलसी कैंडिडेट लिस्ट जारी करने वाली पहली पार्टी थी।

राजद के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी का माहौल था। पार्टी के वरीय नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद ने बिना पूछे ही अपने उम्मीदवार उतार दिए। सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन में कोई वार्ता तक नहीं की गई।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद के इस ‘मनमाने रवैये’ के चलते ही अब कांग्रेस ने भी ‘फ्रेंडली फाइट’ का फैसला लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नई दिल्ली से की गई।

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विधानसभा चुनाव में फ्रेंडली फाइट का क्या हुआ था असर?

बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे। नामांकन की प्रक्रिया जारी है, जिसकी आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है। यदि नामांकन तक दोनों दलों के बीच सहमति बन जाती है, तो ‘फ्रेंडली फाइट’ से बचा जा सकता है।

हालांकि, पिछले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी महागठबंधन के अंदर ऐसी ही ‘फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिली थी। उस समय कुल 11 सीटों पर विपक्षी दलों के उम्मीदवार आमने-सामने थे। इनमें से कहलगांव, वैशाली, नरकटियागंज, सिकंदरा और सुल्तानगंज सीट पर कांग्रेस और राजद के बीच ‘दोस्ताना मुकाबला’ हुआ था। रोचक बात यह है कि इन सभी सीटों पर ना तो राजद और ना ही कांग्रेस के उम्मीदवार जीत पाए थे। महागठबंधन में हुई इस ‘फ्रेंडली फाइट’ का सीधा फायदा एनडीए को मिला था, जिससे इस बार भी ऐसी ही स्थिति होने पर परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं।

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