Bihar Pakistan Spy: देश की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले में बिहार के बेगूसराय जिले से सनसनीखेज खबर सामने आई है। भारतीय सेना के एक पूर्व जवान रितेश कुमार को पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के आरोप में असम पुलिस ने गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब रितेश ने अपने परिवार को बताया था कि वह असम सचिवालय में नौकरी कर रहा है।
बेगूसराय के बरौनी थाना क्षेत्र के पपरौर गांव निवासी रितेश कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं। असम पुलिस ने उसे गुवाहाटी के सतगांव इलाके में स्थित उसके किराए के मकान से पकड़ा। रितेश साल 2006 में भारतीय सेना में शामिल हुआ था और 2023 में सेना से रिटायर हुआ था। इस मामले के सामने आने के बाद बेगूसराय पुलिस भी तुरंत सक्रिय हो गई है और स्थानीय स्तर पर रितेश की पहचान, उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि और संपर्कों के बारे में गहन जानकारी जुटाई जा रही है। रितेश कुमार अशोक सिंह के पुत्र बताए जा रहे हैं।
मोतिहारी के अभिषेक की गिरफ्तारी से खुला राज
असम पुलिस की जांच में मोतिहारी निवासी 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद रितेश कुमार का नाम सामने आया। अभिषेक पर आरोप है कि वह गुवाहाटी में रहते हुए भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील और खुफिया जानकारियां पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचा रहा था। पुलिस ने अभिषेक के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पाकिस्तान से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर असम में भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन तक पहुंचाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद भारतीय सेना की गजराज कोर और असम पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू की। बीते शनिवार-रविवार की रात अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ ने मामले की जांच को आगे बढ़ाया।
पुलिस का आरोप है कि रितेश पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) के निर्देश पर काम कर रहा था और उसने अभिषेक की मदद भी की थी। हालांकि, मामले में रितेश की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसियों के रडार पर पूरा नेटवर्क
जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि रितेश और मोतिहारी निवासी अभिषेक कुमार सिंह के बीच संपर्क कैसे बना। दोनों की पहचान कब हुई और कथित तौर पर वे कब से एक-दूसरे के संपर्क में थे, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दोनों के बीच किस तरह की सूचनाओं का आदान-प्रदान होता था और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। अभिषेक के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे उसके संपर्कों और कथित गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इधर, बेगूसराय पुलिस भी इस मामले को लेकर गंभीर हो गई है। पुलिस की ओर से रितेश के स्थानीय पते का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार, गांव में उसके संपर्क और पृष्ठभूमि से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने तथा आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही उसकी भूमिका के संबंध में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है, जिसकी गहराई से पड़ताल की जा रही है।






