Bihar Vigilance Bureau: भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार सरकार की मुहिम अब तेजी पकड़ रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) ने भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने में पिछले 25 वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल अक्टूबर 16 तक, ब्यूरो ने 22 भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई है, जो वर्ष 2000 से 2024 तक के औसत 5.6 से लगभग चार गुना अधिक है। इस अवधि में सजा दिलाने की दर में 293 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो ब्यूरो की प्रभावी कार्यशैली को दर्शाता है।
निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने इन आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की रफ्तार भी काफी तेज हुई है। मौजूदा समय में हर डेढ़ दिन में कम से कम एक भ्रष्टाचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिसका मतलब है कि हर तीन दिन में दो मामले दर्ज होते हैं। यह आंकड़ा 2025 के दो दिन में एक एफआईआर और 2024 तक के औसतन 11.5 दिन में एक एफआईआर से कहीं बेहतर है।
भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने में रिकॉर्ड उछाल
डीजी गंगवार ने बताया कि निगरानी ब्यूरो ने न केवल केस दर्ज करने में तेजी दिखाई है, बल्कि उन्हें सजा दिलाने में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। औसतन 13 साल लगने वाले ट्रायल के समय को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए अतिरिक्त विशेष निगरानी अदालतों का गठन, समय पर गवाही और चार्जशीट दाखिल करने जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर जोर दिया जा रहा है।
डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा, ‘मौजूदा समय में प्रत्येक 1.5 (डेढ़) दिन में किसी न किसी भ्रष्टाचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि हर तीन दिन में दो भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। अभी ट्रायल कराने में औसतन 13 वर्ष का समय लग रहा, जिसे कम करने पर खासतौर से फोकस किया जा रहा है।’
हाल ही में निगरानी ब्यूरो कार्यालय के सभागार में प्रोन्नति सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस दौरान बिहार पुलिस महकमा में इंस्पेक्टर से डीएसपी पद पर प्रोन्नत हुए 55 अधिकारियों में से एक शालिग्राम कुमार को डीजी गंगवार ने कंधे पर स्टार लगाकर सम्मानित किया।
केस दर्ज करने की रफ्तार भी तेज, हर डेढ़ दिन में एक FIR
कार्रवाई की रफ्तार के मामले में भी ब्यूरो ने 25 वर्षों (वर्ष 2000 से 2004 तक) के दौरान सभी तरह के मामलों (ट्रैप, आय से अधिक संपत्ति- DA और पद के भ्रष्ट दुरुपयोग- AOPA) में औसत 73 कांड दर्ज किए थे। 2026 में यह संख्या बढ़कर 124 हो गई है, जिसमें 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिर्फ ट्रैप के मामलों पर गौर करें तो पिछले 25 वर्षों का औसत 47 था, जबकि इस साल अब तक 113 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो 140 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 142 तक पहुंचने की संभावना है।
आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामलों में भी ब्यूरो ने सक्रियता दिखाई है। 25 वर्षों का औसत 8 था, जो इस साल बढ़कर 10 हो गया है, यानी 25 फीसदी की बढ़ोतरी। हालांकि, पद के भ्रष्ट दुरुपयोग (AOPA) से संबंधित मामलों में कमी आई है। पिछले 25 वर्षों में 18 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस साल केवल 2 मामले दर्ज किए गए हैं।
शिक्षक जांच और AOPA मामलों की स्थिति
एओपीए मामलों में कमी का कारण बताते हुए डीजी गंगवार ने कहा कि अब किसी लोक सेवक के खिलाफ पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है। विभागीय अनुमति मिलने में देरी के कारण इन मामलों में समय अधिक लग रहा है।
शिक्षक जांच के मामले में भी ब्यूरो की कार्रवाई जारी है। पिछले 11 वर्षों से चल रही इस जांच में अब तक कुल 1717 एफआईआर दर्ज की गई हैं। औसतन प्रति वर्ष 156 एफआईआर दर्ज होती थीं, जबकि इस साल अकेले 166 कांड दर्ज हुए हैं, जो 42 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह आंकड़े पटना में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।







