Bihar Folk Singer: बिहार की माटी का नाम एक बार फिर रोशन हुआ है. प्रदेश की सुप्रसिद्ध लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2025’ से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित रवींद्र भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया, जिससे बिहार की लोककला को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है.
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मनीषा श्रीवास्तव को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया. भारत सरकार द्वारा यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हर साल लोककला और संगीत के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले देश के चुनिंदा युवा कलाकारों को दिया जाता है. यह मनीषा की 18 वर्षों की अटूट साधना और समर्पण का परिणाम है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
18 वर्षों की साधना से बनाई अलग पहचान, इन भाषाओं में गाए गीत
मनीषा श्रीवास्तव ने बीते 18 वर्षों के लंबे सफर में अपनी अनवरत साधना और कड़ी मेहनत के दम पर गायकी के क्षेत्र में एक विशिष्ट मुकाम हासिल किया है. उन्होंने भोजपुरी, मैथिली, अवधी, मगही, हिंदी और संस्कृत जैसी समृद्ध भाषाओं में पारंपरिक लोकगीत गाकर श्रोताओं के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी है. उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने वर्तमान दौर में प्रचलित फूहड़ता, अश्लीलता और बाजारू गीतों की होड़ से खुद को पूरी तरह दूर रखा है. मनीषा ने अपनी एक अलग लकीर खींचते हुए लोक संस्कृति की जड़ों को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य किया है, जो आज के समय में अत्यंत दुर्लभ है.
राष्ट्रीय सम्मान को संस्कृति के लिए संघर्षरत कलाकारों को किया समर्पित
यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होने के बाद मनीषा श्रीवास्तव ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इसे अपनी मिट्टी का सम्मान बताया. उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी समर्पित कलाकारों का है, जो आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भी अपनी पारंपरिक संस्कृति और अस्मिता को जीवित रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं.
मनीषा श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह पुरस्कार केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी समर्पित कलाकारों का है जो आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भी अपनी पारंपरिक संस्कृति और अस्मिता को जीवित रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं.’
लोक गायन के अलावा मनीषा लोक साहित्य, पारंपरिक परंपराओं और समसामयिक विषयों पर गंभीर लेखन में भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. उनका यह सम्मान बिहार की लोककला और संस्कृति के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो युवा कलाकारों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.







