Bihar Health Department: बिहार के स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बिहार स्वास्थ्य विभाग लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा क्षेत्र में सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार के नेतृत्व में एक जांच टीम ने कई निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और जांच घरों पर औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया, क्योंकि टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही कई स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सक और कर्मचारी मौके से गायब हो गए।
निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्पताल और निजी क्लीनिक बंद मिले। बिना निबंधन के संचालित हो रहे कई जांच घरों में भी ताले लटके पाए गए, जिससे उनके अवैध संचालन का संदेह गहरा गया है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध लाइसेंस के किसी भी स्वास्थ्य संस्थान को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बंद मिला गंगाराम हॉस्पिटल, संचालन रोकने का निर्देश
जांच टीम ने सबसे पहले गंगाराम हॉस्पिटल का निरीक्षण किया, जहां चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। अस्पताल में न तो कोई चिकित्सक मिला और न ही कोई मरीज भर्ती पाया गया। मौके पर केवल दो महिला कर्मी ही मौजूद थीं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से राजीव ठाकुर ने बताया कि यह अस्पताल एक एनजीओ के माध्यम से संचालित हो रहा है और स्थानीय स्तर पर निबंधन की प्रक्रिया अभी जारी है। इस पर सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल का संचालन बंद करने का निर्देश दिया, जब तक कि उसे वैध लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता।
एसए हेल्थ केयर को आईसीयू बनाने का आदेश
टीम ने दरभंगा अल्ट्रासाउंड और भरवाड़ा स्थित न्यू अपोलो अस्पताल का भी निरीक्षण किया। इसके बाद एसए हेल्थ केयर की जांच की गई, जहां दो चिकित्सक मौजूद मिले। संचालक ने बताया कि उनके अस्पताल के निबंधन की प्रक्रिया चल रही है। कागजात की प्रारंभिक जांच के बाद सिविल सर्जन ने एसए हेल्थ केयर को एक अहम निर्देश दिया। 12 बेड वाले इस अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज के लिए अनिवार्य रूप से आईसीयू कक्ष की व्यवस्था अविलंब करने को कहा गया।
बिना लाइसेंस संचालन पर होगी कड़ी कार्रवाई
तारा हॉस्पिटल के निरीक्षण में एक आयुष चिकित्सक मौजूद मिले, लेकिन अस्पताल प्रबंधन आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने में असमर्थ रहा। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रेमचंद प्रसाद को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि जिन अस्पतालों, निजी क्लीनिकों और जांच घरों के पास वैध लाइसेंस नहीं हैं, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार ने सख्त लहजे में कहा, ‘वैध लाइसेंस के बिना स्वास्थ्य संस्थानों का संचालन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।’
इस औचक निरीक्षण से निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में हड़कंप मचा हुआ है और उम्मीद है कि इससे अवैध रूप से चल रहे संस्थानों पर लगाम लग सकेगी। आगे भी स्वास्थ्य विभाग की ऐसी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।







