Bihar JDU Politics: मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में भारी हलचल मच गई है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के ठीक बाद, केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की। करीब आधे घंटे तक चली इस बैठक को मौजूदा सियासी परिस्थितियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अनंत सिंह और उनकी पत्नी के निष्कासन का फैसला पार्टी ने अचानक लिया। यह कार्रवाई विधानपरिषद चुनाव के दौरान हुए विवाद का परिणाम है। उस समय अनंत सिंह और जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। मामला इतना बढ़ गया था कि पार्टी ने वरिष्ठ नेता ललन सिंह को दोनों नेताओं से बातचीत कर सुलह कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि ललन सिंह का क्षेत्र होने के कारण उन्हें इस विवाद को सुलझाने के लिए अधिकृत किया गया था।
अनंत सिंह का विरोध और पार्टी का कड़ा रुख
विधानपरिषद चुनाव में अनंत सिंह अपने रुख से बिल्कुल पीछे नहीं हटे। उन्होंने पटना स्नातक सीट से जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार का खुले तौर पर विरोध किया। इसके बजाय, उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान कर दिया। चुनाव प्रचार के दौरान भी अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर लगातार हमला बोला। ललन सिंह के पटना आगमन के तुरंत बाद ही पार्टी ने अनंत सिंह पर यह कड़ी कार्रवाई कर दी।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था, ‘दोनों नेता ललन सिंह के क्षेत्र से आते हैं, इसलिए उन्हें दोनों से बात करने के लिए अधिकृत किया गया है।’
ललन सिंह और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अहम मुलाकात
25 अक्टूबर को हुई ललन सिंह और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की यह मुलाकात कई मायनों में अहम है। अनंत सिंह जैसे कद्दावर नेता पर कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर और बाहर इसके गहरे निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास पर 30 मिनट की इस बैठक ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच पार्टी की अंदरूनी रणनीति और आगामी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई होगी।
इस मुलाकात के बाद जदयू की आगे की रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह घटनाक्रम आगामी चुनावों से पहले पार्टी के भीतर एक नए समीकरण का संकेत दे रहा है, जहां अनुशासन और एकजुटता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।








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