Bihar Politics Nitish Kumar: जनता दल यूनाइटेड (JDU) से मोकामा विधायक अनंत सिंह के निष्कासन के बाद बिहार की राजनीति में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह यादव ने इस घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या से क्या हो गया देखते-देखते!”
शक्ति सिंह यादव ने अनंत सिंह की पार्टी से विदाई को JDU के बदलते राजनीतिक स्वरूप और संगठन के भीतर नेतृत्व की भूमिका से जोड़कर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने समता पार्टी के गठन से लेकर JDU के मौजूदा दौर तक के इतिहास का जिक्र किया।
नीतीश कुमार पर RJD का तीखा प्रहार
शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, “समता पार्टी का निर्माण करते वक्त नीतीश कुमार जी ने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि एक समय ऐसा आएगा अचेत होने के कारण उनकी ही पार्टी आँखों के सामने छत-विछत होती रहेगी और वे एक मूकदर्शक बनकर चुपचाप देखते रहेंगे—क्योंकि आज वे कुछ कर पाने की स्थिति में ही नहीं हैं!” उन्होंने JDU के गठन और नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा पर सवाल खड़े किए।
शक्ति सिंह यादव ने कहा, “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे नीतीश जी ने ठगा नहीं!”
राजद नेता ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि जनता दल से सात सांसदों ने अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में पहले ‘जनता दल (जॉर्ज)’ गुट की मान्यता ली थी। इसके कुछ समय बाद जॉर्ज साहब ने ही ‘समता पार्टी’ का गठन किया। 1995 के विधानसभा चुनाव में समता पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहने पर, सत्ता की ललक में इन लोगों ने अपनी विचारधारा को ताक पर रखकर भाजपा से गठजोड़ कर लिया।
पुराने साथियों को ‘ठगने’ का आरोप
अपेक्षित सफलता न मिलने पर अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के लिए विचारोपरांत शरद यादव के नेतृत्व वाले दल में समता पार्टी का विलय कर दिया गया और तब जाकर ‘जनता दल (यूनाइटेड)’ के नाम से एक नई पहचान बनी। शक्ति सिंह यादव ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जिस जॉर्ज साहब ने समता पार्टी को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर पाला-पोसा और सींचा, उनके साथ क्या हुआ? ‘बड़ी बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले’—यह पंक्ति जॉर्ज साहब पर अक्षरशः लागू हुई!”
उन्होंने दिग्विजय सिंह, रघुनाथ झा और शरद यादव जैसे नेताओं का भी जिक्र किया, जिन्होंने नीतीश कुमार को बनाने में भूमिका निभाई, लेकिन अंत में उनका क्या हाल किया गया, यह किसी से छिपा नहीं है। शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि जो लोग नीतीश कुमार के ‘तालाब की मछली’ बनकर रहे, मुँह पर कुछ नहीं बोले और सिर्फ ‘नीतीश नाम केवलम्’ का जाप करते रहे, जैसे बशिष्ठ नारायण सिंह, वे शांति से अपना पद और काम पाते रहे।
‘सत्ता प्राप्ति के लिए अनैतिक आचरण ही राजधर्म’
राजद नेता ने 2005 में भाजपा के साथ सत्ता प्राप्त करने के लिए नीतीश कुमार पर राजनीतिक शुचिता की सारी सीमाएं लांघने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार के उत्तर, पूरब, पश्चिम, दक्षिण—यहाँ तक कि ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य कोण का भी कोई ऐसा बाहुबली नहीं बचा था जिसे उन्होंने अपने साथ न जोड़ा हो। इन राजनीतिक पापों व कुकृत्यों पर पर्दा डालने के लिए सरकारी दफ्तरों में गांधी जी के ‘सात सामाजिक पापों’ के बोर्ड टंगवा दिए गए।
शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि अगर देश में बिना सिद्धांत की राजनीति करने के कोई सबसे बड़े पथ-प्रदर्शक और आइडियल हैं, तो वह नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने ‘सत्ता प्राप्ति के लिए किए गए अनैतिक आचरण’ को ही अपना ‘राजधर्म’ मान लिया। उन्होंने बताया कि 2005 के बाद JDU में उन लोगों का आगमन शुरू हुआ जिनका सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और समतामूलक समाज से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था।
JDU की कमान गैर-समाजवादी पृष्ठभूमि के हाथों में
शक्ति सिंह यादव ने JDU की मौजूदा कमान संभालने वाले नेताओं की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज उन लोगों की पृष्ठभूमि खंगाल कर देखिए जिन्होंने JDU की कमान अपने हाथ में ले रखी है और जो दल के फैसले ले रहे हैं—उनमें से किसी की भी पृष्ठभूमि समता पार्टी या समाजवादी विचारधारा की नहीं है। वे सब भाजपा और कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आए हुए लोग हैं। खाटी समता पार्टी या JDU का इक्का-दुक्का आदमी जो बचा भी है, वह बेचारा कहीं कोने में चुपचाप पड़ा है, सीन में कहीं दिखाई भी नहीं देता।
इसी ‘कब्जे’ का परिणाम है कि ललन सिंह के दिल्ली से पटना आते ही उनकी आँखों के सामने अनंत सिंह की पार्टी से विदाई कर दी गई। शक्ति सिंह यादव ने याद दिलाया कि यह वही अनंत सिंह हैं जिन्होंने पिछली बार नीतीश कुमार की सरकार और कुर्सी बचाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल को धोखा दिया था।
नीतीश कुमार की ‘मानसिक अचेतता’ पर टिप्पणी
राजद नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वर्तमान स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “आज नीतीश कुमार की मानसिक अचेतता का आलम यह है कि उन्हें उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जबरन गाड़ी में बैठाकर पार्टी कार्यालय या किसी श्राद्ध कार्यक्रम में ले जाया जाता है और हाथ जुड़वाकर वापस निकाल दिया जाता है। माता की प्रतिमा के दर्शन के दौरान चंदन की कटोरी सीधे माँ के मुख पर फेंक देना नीतीश जी की गलती नहीं है, बल्कि उनकी वर्तमान मानसिक और शारीरिक अचेतता का प्रतीक है।”
अंत में, शक्ति सिंह यादव ने कहा कि मानवता के नाते एक बुजुर्ग और अचेत व्यक्ति के प्रति उनकी पूरी सहानुभूति और सम्मान है, लेकिन यह प्रकृति का नियम है कि मनुष्य जो कर्म करता है, उसे इसी जीवन में चुकता करके जाना पड़ता है। उन्होंने टिप्पणी की कि आज नीतीश कुमार अपनी ही आँखों के सामने सब कुछ तहस-नहस होते देखने को विवश हैं।







