Bihar Mahaviri Jhanda: बिहार के जाले नगर परिषद क्षेत्र और धमाद गांव में शनिवार को 121वां महावीरी झंडा महोत्सव धूमधाम और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। बजरंगबली के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पवनपुत्र की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन करते हुए पारंपरिक हथियारों का अद्भुत प्रदर्शन किया, साथ ही मनमोहक झड़नी गायन भी प्रस्तुत किया गया।



जाले नगर परिषद क्षेत्र के जालेश्वरी स्थान में आयोजित महावीरी झंडा । फोटो देशज टाइम्स
जाले नगर में 121वें महावीरी झंडा महोत्सव की शुरुआत महावीर मंदिर परिसर से हुई। यहां से बांस से बने प्रतीकात्मक महावीरी झंडे और बजरंगबली की विशाल प्रतिमा के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु ‘जय शिव, जय बजरंगबली’ के जयकारे लगाते हुए माता जलेश्वरी मंदिर परिसर पहुंचे। बरईटोला स्थित निर्मल महावीर मंदिर, पच्छियारी टोला मंदिर, सुभाष चौक मंदिर और हीरानगर भूदेवस्थान मंदिर से भी श्रद्धालुओं की टोलियां निकलीं, जिनमें पारंपरिक हथियारों के साथ लाठी, भाला, गड़ासा और योगचांप का शानदार प्रदर्शन किया गया।
नगर भ्रमण में निकली हनुमान की प्रतिमा । फोटो : देशज टाइम्स
जाले में गगनचुंबी झंडे और अखाड़ों का प्रदर्शन
परंपरा के अनुसार, निर्मल हनुमान मंदिर का गगनचुंबी महावीरी झंडा पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच दर्जनों पताकाओं के साथ नगर परिक्रमा पर निकला। यह शोभायात्रा जाले हाट स्थित ब्रह्मस्थान और रामबाग के रामजानकी ठाकुरबाड़ी से होते हुए भूदेव शिव मंदिर की परिक्रमा कर महावीर बाजार पहुंची। इसके बाद, यात्रा पुनः माता जलेश्वरी मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। यहां आधा दर्जन गांवों से आए अखाड़ों के खिलाड़ियों ने बांस से बने विशेष वाद्ययंत्रों की धुन पर ‘झड़नी नृत्य’ प्रस्तुत किया, जिसमें भगवान हनुमान की जीवनगाथा का भक्तिपूर्ण गायन किया गया। इस झड़नी नृत्य ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
धमाद गांव में भी दिखा उत्साह, तीन अखाड़ों ने किया प्रदर्शन
वहीं, देउरा-बंधौली पंचायत के धमाद गांव में भी महावीरी झंडा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यहां एक गगनचुंबी महावीरी झंडे को इंद्रपूजा मैदान स्थित धमाद चौक पर बने वेदी पर स्थापित किया गया। श्रद्धालुओं ने झंडे में विराजमान बजरंगबली सहित विभिन्न देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान पारंपरिक हथियारों से विभिन्न खेल विधाओं का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। तीन अखाड़ों के खिलाड़ियों ने भी झड़नी नृत्य प्रस्तुत कर बजरंगबली का गुणगान किया, जिससे पूरे गांव में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
यह महोत्सव बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन गया, जहां सभी वर्ग के लोगों ने मिलकर इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया।








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