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कभी छेड़ा साथ तराना सलामत रहे दोस्ताना हमारा,आज अखिलेश के करीबी अमित बने जानी दुश्मन

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कभी छेड़ा साथ तराना सलामत रहे दोस्ताना हमारा,आज अखिलेश के करीबी अमित बने जानी दुश्मनचुनाव डेस्क, देशज टाइमस। आजमगढ़ कभी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे अमित जानी अब अखिलेश यादव के खिलाफ ही चुनावी मैदान में ताल ठोकेंगें। यूपी नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जानी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला और कहा कि वे चुनाव में अखिलेश यादव के चेहरे को बेनकाब करेंगे।

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कभी छेड़ा साथ तराना सलामत रहे दोस्ताना हमारा,आज अखिलेश के करीबी अमित बने जानी दुश्मनशुक्रवार को नगर के एक हगार में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जानी ने कहा कि वे समाजवादी पार्टी में पिछले सात वर्षों तक अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे हैं। लोग अखिलेश यादव के नीतियों, विचारों और आचारण को आजमगढ़ के लोग नहीं जानते हैं। इनके इसी चाल, चरित्र और चेहरे से नकाब हटाने के लिए इनके खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास नेता नहीं बल्कि अभिनेता मैदान में है इसलिए उनकी निरहुआ से लड़ाई नहीं बल्कि नेता अखिलेश अखिलेश यादव और अमित जानी (फाइल फोटो) यादव से सीधी लड़ाई है। अमित जानी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछले लोकसभा चुनाव में अपने पिता मुलायम सिंह यादव को चुनाव हराना चाहते थे। उन्होंने आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव का चुनाव फंसने के बावजूद सभी कार्यकर्ताओं को कन्नौज भेज रहे थे। आज वही अखिलेश यादव इस सीट से मुलायम के वारिश बन कर चुनावी मैदान में है। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ किसी का गढ़ नहीं है बल्कि यहां की जनता का गढ़ है।
Image result for अखिलेश यादव के करीबी अमित जानी उन्होंने कहा कि महागठबंधन के नाम पर लूट का गठबंधन बनाकर प्रदेश में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और आजम खां दलितों को गंदगी समझते हैं। कहा 2012 में अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री बने तो वे कहते थे लखनऊ में जो मायावती की मूर्तिया बनी है वह गंदगी का प्रतीक है और इस गंदगी को हटाना है। वही आजम खां भी लगातार विरोध करते थे। लेकिन आज दोनों लोग अपनी दुकान को बचाने के लिए आपस में लूट का गठबंधन कर लिये है। Related image उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव दलितों और पिछड़ो के दुश्मन हैं। अमित जानी ने कहा कि उनका मकसद केवल अखिलेश यादव को चुनाव में मात देना है। और अगर वह यहां से चुनाव जीतते हैं। तो आजमगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाकर यहां का सर्वागींण विकास करेंगे। गौरतलब है कि अमित जानी वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी का दामन थामें थे और कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबीयों में गिने जाते थे। वर्ष 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में अमित जानी ने बसपा सुप्रिमों मायावती की मूर्तियों को तोड़कर काफी सुर्खियां बटोरी थी और महाराष्ट्र में यूपी के लोगों पर हमले के बाद वे उन्होंने यूपी नवनिर्माण सेना का गठन किया था। कभी छेड़ा साथ तराना सलामत रहे दोस्ताना हमारा,आज अखिलेश के करीबी अमित बने जानी दुश्मन

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