Darbhanga News: देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए 19 साल की छोटी उम्र में फांसी के फंदे पर झूलने वाले युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस को दरभंगा में वकीलों ने नमन किया है. मंगलवार को दरभंगा जिला बार एसोसिएशन भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने उनकी शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की.
अधिवक्ता रमणजी चौधरी की अध्यक्षता में हुए इस शहादत दिवस समारोह में अमर शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें स्मरण किया गया. इस अवसर पर मौजूद वकीलों ने उनके अदम्य साहस और बलिदान की गाथा सुनाई.
खुदीराम बोस का बलिदान: मुजफ्फरपुर से जुड़ा था इतिहास
कार्यक्रम में अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने खुदीराम बोस के ऐतिहासिक बलिदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि किस प्रकार युवा क्रांतिकारी बोस मुजफ्फरपुर आए थे और बंगाल के क्रांतिकारियों का दमन करने वाले ब्रिटिश जज डगलस किंग्सफोर्ड की वग्गी पर बम फेंका था. इस घटना में दो अंग्रेज महिलाओं की मौत हो गई थी, जिसके आरोप में उन्हें 11 अगस्त 1908 को फांसी दे दी गई थी.
युवा क्रांतिकारी बोस ने मुजफ्फरपुर आकर बंगाल के क्रान्तिकारियों का दमन करने वाले ब्रिटिश जज डगलस किंग्सफोर्ड की वग्गी पर बम फेंका था। जिसमें दो अंग्रेज महिला की मौत हो गई थी। जिस आरोप में उन्हें 11 अगस्त 1908 को फांसी दे दी गई थी।
शहादत दिवस पर मौजूद रहे ये गणमान्य
इस भावपूर्ण अवसर पर कई अधिवक्ता, मुंशी और न्याय अतिथि मौजूद रहे, जिन्होंने खुदीराम बोस के बलिदान को याद किया. कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख नामों में अधिवक्ता नरेश कुमार झा, महेश कुमार सिन्हा, प्रदीप यादव, संजीव कुमार, प्रमोद शंकर चौधरी, पंकज कुमार सिंह, कुलदीप दिवान, राजू पंडित, विनय कुमार झा और दीपक कुमार शामिल थे. सभी ने खुदीराम बोस के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया.
दरभंगा के अधिवक्ताओं द्वारा खुदीराम बोस को दी गई यह श्रद्धांजलि, देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करने और युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है.







