Darbhanga Har Ghar Tiranga: स्वतंत्रता दिवस से पहले, दरभंगा जिले में ‘हर घर तिरंगा अभियान-2026’ को जीविका दीदियों के श्रम और समर्पण से नई पहचान मिल रही है। जिलाधिकारी कौशल कुमार के मार्गदर्शन और डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी के कुशल नेतृत्व में हजारों जीविका दीदियां राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में जुटी हैं। यह अभियान उनके लिए सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।
जिले के सभी 18 प्रखंडों की जीविका दीदियां सिलाई केंद्रों और अपने घरों में दिन-रात तिरंगे तैयार कर रही हैं। यह पहल उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ राष्ट्र के गौरवशाली अभियान में प्रत्यक्ष योगदान देने का सुनहरा मौका भी दे रही है।
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने निरंतर कार्य का जायजा लेते हुए दीदियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘अपने हुनर और मेहनत से तिरंगा तैयार कर जीविका दीदियां राष्ट्रसेवा के साथ महिला सशक्तीकरण की प्रेरक मिसाल पेश कर रही हैं।’
उप विकास आयुक्त श्री स्वप्निल ने जीविका दीदियों को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप तिरंगे बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिरंगा निर्माण में गुणवत्ता और मानकों का पालन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि जिले के प्रत्येक प्रखंड में लगभग 4,000 तिरंगे और जिला स्तर पर लगभग 4,000 तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रकार, दरभंगा जिले में कुल 76,000 तिरंगे बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिन्हें संबंधित विभागों और संस्थानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रशिक्षण से सशक्तिकरण की कहानी
जीविका दीदियां निर्धारित मानकों, गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए तिरंगा निर्माण में लगी हैं। डॉ. गार्गी ने बताया कि हाल ही में 18 प्रखंडों के विभिन्न ग्राम संगठनों में हजारों जीविका दीदियों को प्रशिक्षित प्रशिक्षकों के माध्यम से कपड़ा सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया था। अब ये प्रशिक्षित दीदियां अपने हुनर का उपयोग तिरंगा निर्माण में कर रही हैं। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार ने जीविका दीदियों को तिरंगा निर्माण और आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी है। सिलाई केंद्रों पर तैयार तिरंगों की गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग के बाद, जिला प्रशासन के निर्देशानुसार उनकी आपूर्ति की जा रही है।
संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि जीविका के सहयोग और प्रशिक्षण से सिलाई और वस्त्र निर्माण हजारों दीदियों के लिए आजीविका का सशक्त माध्यम बन रहा है। कई दीदियां आंगनबाड़ी बच्चों के वस्त्र निर्माण से आय अर्जित कर रही हैं, जबकि प्रशिक्षित दीदियां दूसरों को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रही हैं। किरतपुर प्रखंड की जीविका दीदी रिंकी सिंह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा:
‘मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे अपने हाथों से तिरंगा बनाने और राष्ट्रध्वज निर्माण में योगदान देने का सौभाग्य मिलेगा। जब अपने हाथों से तैयार किए गए तिरंगे को देखती हूं तो मन गर्व से भर जाता है। यह काम मेरे लिए सिर्फ आय का जरिया नहीं है, बल्कि मेरे हुनर और देशभक्ति का सुंदर संगम है। तिरंगा बनाकर ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं भी अपने श्रम और हुनर के माध्यम से देश के प्रति अपना योगदान दे रही हूं।’
‘वंदे मातरम्’ थीम पर विशेष आयोजन
स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल संघों से जुड़ी हजारों जीविका दीदियां इस अभियान में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही हैं। इससे महिलाओं को रोजगार और आय के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को निभाने का गौरव भी मिल रहा है। ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करना है।
इस वर्ष ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ की थीम पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 9 से 17 अगस्त तक जिले के सभी प्रखंडों और पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। इस दौरान ‘तिरंगा थीम’ पर आधारित ‘प्रकाश स्तंभ’, ‘मेरी माटी-मेरा देश’ और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त, ‘वंदे मातरम् प्रदर्शनी’, ‘तिरंगा रैली’, ‘वंदे मातरम् का सामूहिक गायन’, ‘सेल्फी विद तिरंगा’, ‘तिरंगा यात्रा’ और ‘संकल्प विद तिरंगा अभियान’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत किया जाएगा।








You must be logged in to post a comment.