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Bihar Measles Rubella Vaccination खसरा-रूबैला के खिलाफ बिहार में जंग शुरू ! 31 अगस्त तक चलेगा विशेष अभियान

Bihar Measles Rubella Vaccination: राज्य स्वास्थ्य समिति ने छूटे हुए 58 हजार से अधिक बच्चों को चिन्हित कर टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। इस अभियान में विटामिन-ए की खुराक भी दी जाएगी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बताया सरकार की प्रतिबद्धता।

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Bihar Measles Rubella Vaccination: बिहार सरकार ने खसरा-रूबैला जैसी जानलेवा बीमारियों के उन्मूलन के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ा है। वर्ष 2026 तक शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य लेकर, राज्य स्वास्थ्य समिति ने 31 अगस्त 2026 तक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस पहल के तहत बिहार में खसरा-रूबैला टीकाकरण से छूटे हुए सभी बच्चों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा।

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जनवरी से जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न प्रखंडों में 58,002 बच्चे अभी तक खसरा-रूबैला के टीके से वंचित हैं। इनमें से 161 प्रखंडों में 35,969 बच्चों को एमआर-1 (पहली खुराक) नहीं मिली है, जबकि 104 प्रखंडों में 22,033 बच्चों को एमआर-2 (दूसरी खुराक) नहीं दी जा सकी है। इन सभी बच्चों को चिन्हित कर नियमित टीकाकरण दिवसों के साथ-साथ स्वास्थ्य संस्थानों पर भी टीका लगाया जाएगा।

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9 माह से 5 वर्ष के बच्चों को मिलेगा टीका और विटामिन-ए की खुराक

विशेष अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष आयु वर्ग के सभी छूटे हुए बच्चों का सर्वे करके ‘ड्यू लिस्ट’ तैयार की जा रही है। प्रखंड स्तर से जिला और फिर राज्य स्तर पर रिपोर्ट भेजने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद 31 अगस्त 2026 तक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), अनुमंडल अस्पताल (SDH) और जिला अस्पतालों में लक्षित बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

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टीकाकरण के साथ-साथ, लक्षित बच्चों को विटामिन-ए की खुराक भी दी जाएगी। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार, अगस्त 2026 से अगले तीन महीनों तक 9 माह से 5 वर्ष के सभी बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप विटामिन-ए उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए नियमित टीकाकरण और ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND) सत्रों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विटामिन-ए से वंचित बच्चों की पहचान और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई में मदद मिलेगी।

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डेटा ट्रैकिंग और जनभागीदारी से होगा अभियान सफल

अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, टीकाकृत किए गए सभी बच्चों का 100 प्रतिशत डेटा HMIS और U-WIN पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। दैनिक प्रगति की निगरानी गूगल शीट के माध्यम से की जाएगी, जिससे जिला और प्रखंड स्तर पर टीकाकरण की स्थिति की नियमित समीक्षा हो सकेगी।

इस जनहितैषी अभियान को व्यापक समर्थन देने के लिए पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका समूहों और अन्य सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। ये समूह अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक कर छूटे हुए बच्चों को टीकाकरण सत्रों तक लाने में मदद करेंगे। अभियान के प्रभावी संचालन और अनुश्रवण के लिए प्रखंड स्तर पर प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक तथा जिला स्तर पर जिला सामुदायिक उत्प्रेरक को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीकाकरण के दौरान वैक्सीन की कमी न हो, इसके लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त एमआर वैक्सीन वायल भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा, “बिहार सरकार बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। खसरा-रूबैला जैसी गंभीर बीमारियों से बच्चों की सुरक्षा के लिए शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य में कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए 31 अगस्त 2026 तक विशेष अभियान चलाकर सभी छूटे हुए बच्चों को खसरा-रूबैला का टीका दिया जाएगा। सरकार का प्रयास केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के समग्र स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य से लक्षित बच्चों को विटामिन-ए की खुराक भी सुनिश्चित की जा रही है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं टीकाकरण सत्रों पर वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वैक्सीन वॉयल उपलब्ध कराए जाएंगे।”

खसरा-रूबैला एक अति संक्रामक रोग है, जिससे निमोनिया, दस्त और मस्तिष्क में संक्रमण जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। यह नवजात शिशुओं और बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण भी है। गर्भावस्था के आरंभ में रूबैला संक्रमण से शिशु में कॉन्जेनिटल रूबैला सिंड्रोम (CRS) हो सकता है, जिससे अंधापन, बहरापन, मानसिक मंदता और दिल की बीमारी होने का खतरा रहता है। इन बीमारियों से बचाव के लिए 9 से 12 माह की आयु में पहला टीका और 16 से 24 माह की आयु में दूसरा टीका लगाया जाता है।

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यह अभियान बिहार के बच्चों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें इन गंभीर बीमारियों से बचाने में सहायक होगा।

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