दरभंगा, देशज टाइम्स। मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विद्या भूषण राय ने शनिवार को कहा है कि मिथिला विकास बोर्ड की स्थापना हो व केंद्र सरकार की ओर से एक लाख करोड़ की पैकेज दिया जाए ताकि मिथिला के पिछड़े क्षेत्र का विकास हो इसको लेकर यूनियन दिल्ली में विशाल लॉन्ग मार्च कर नीति आयोग को मिथिला को स्पेशल बोर्ड बनाने का अपना मेमोरेंडम सौंप चुकी है। वहीं एक अक्टूबर को मिथिला बंद व दो दिसंबर को राज मैदान में विशाल रैली कर सभी जिलाधिकारी के माध्यम से भी सरकार तक अपनी मांग सात करोड़ मिथिलावासी यूनियन के माध्यम से लगातार विभिन्न माध्यम से रखती आ रही है लेकिन अब तक मिथिला विकास बोर्ड का गठन नहीं हुआ है। श्री राय ने कहा कि वर्षों से केंद्र व राज्य के सत्ता पर आसीन कुर्सी प्यारों ने मिथिला के साथ सौतेला व्यवहार करने का काम किया है। मिथिला की संपन्नता इनलोगो के मिथिला विरोधी नीति के कारण खो गई है।
मिथिला के संस्कृति व भाषा का संरक्षण व विकास के लिए वर्तमान सरकार कुछ नही सोच रही है। मिथिला में व्यापात कुव्यवस्था, आरजकता, अशिक्षा, गरीबी, पलायन, भुखमरी , स्वास्थ्य की असुविधा को दुरुस्त व जनलाभकारी बनाने को लेकर सरकार की कोई भी ठोस व आमजन हितैषी नीति नहीं है । इसीलिए संविधान के धारा 371(ए-जे) में विकास के आधार पर ऐसे क्षेत्रों जो उद्योग-धंधे व मिलों के बन्द होने से बेरोजगारी-पलायन और गरीबी चरम पर है। हर साल यह क्षेत्र बाढ़ के चपेट में आता है और करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है। ऐसे क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष व्यवस्था की बात करता है। इसके अनुसार वैकाशिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सेपरेट डेवलपमेंट बोर्ड’का गठन किया जाता है जो नहीं हो रहा है। ऐसे में अपनी आवाज जन-जन तक पहुंचाने व जनआक्रोश मूकबधिर सरकार को सुनाने को लेकर सत्रह फरवरी से पैदल यात्रा आरंभ कर विभिन्न माध्यमों नुक्कड़ नाटक-जागरुकता अभियान से समस्त मिथिला के लोगों को आह्वान करते हुए पचीस फरवरी को हजारों की संख्या में एनएच57 पर महाधरना आयोजित कर अनिश्चितकाल के लिए यातायात प्रभावित कर अपने मांग सत्ता में मद में चूर सरकार के समक्ष रखेंगी, जहां मिथिला विकास बोर्ड की आवाज सत्तालोभी के कानों तक पहुंचाया जाएगा।







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