दरभंगा, देशज टाइम्स। समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने व बीवी पाकड़ में अल्लामा इकबाल उर्दू लाइब्रेरी व शोध संस्थान की स्थापना कर गरीबों के लिए मिसाल बने उत्तर बिहार के चर्चित सर्जन नब्बे वर्षीय डॉ. अब्दुल वहाब का निधन हो गया है। निधन से पूरा चिकित्सा जगत समेत आम लोग शोक में डूब गए हैं। उनके निवास स्थान रहमखान मोहल्ला में अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों का दिनभर तांता लगा रहा। लोगों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। उनके पुत्र सर्जन डॉ. आरजू ने बताया कि पिछले दो माह से बीमार चल रहे थे। डॉ. आरजू ने देशज टाइम्स को बताया कि उनकी तबीयत बिगड़ने पर उच्चस्तरीय इलाज के लिए उन्हें पटना ले जाया जा रहा था। इसी दौरान मुजफ्फरपुर टॉल प्लाजा के पास अचेतावस्था में चले गए। भारतीय एकता संगठन के राष्ट्रीय सचिव मो. तहसीन आलम ने बताया कि परिजनों ने तत्काल उन्हें मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वे अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र और पांच पुत्री सहित भरा–पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
गुरुवार की दोपहर मिल्लत कॉलेज के मैदान में उन्हें सिपुर्द–ए–खाक किया गया। डॉ.वहाब 1965 में डीएमसीएच में सर्जन के रूप में योगदान दिए। 1982 में यहां से अरब देश चले गए। कुछ वर्षों बाद लौटकर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में सर्जरी के एचओडी के रूप में योगदान दिए। शिक्षा के क्षेत्र में उनका बड़ा योगदान रहा। अपनी जमीन पर सोगरा गर्ल्स हाईस्कूल की स्थापना की। उनका जीवन सदैव गरीबों के हक की आवाज बनकर गूंजता रहा जो हमेशा उनकी यादों के साथ जिंदा रहेगा।रतीय एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नफिस असलम, दिलिप शाह, गणेश चौधरी, नवाज अली, मास्टर शादाब,मो औशेद, शहवाज चौधरी, मो. फैशल, रणधीर झा, विकास कुमार सिंह,मो. सोनु सरपंच व हायाघाट के सहित सैकड़ो लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है।









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