
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। श्रव्य का सबसे सशक्ति माध्यम होता है नाटक। यह पात्रों के संजोयन, संवाद अदायगी से इस कदर जीवंत हो उठता है कि उसमें लोग अपना वर्तमान झांकने लगते हैं। वो भी खासकर तब जब नाटक की प्रासंगिकता सामयिकता को टटोलता उससे विमर्श करता दिखे। ऐसा ही कुछ हुआ है गुरुवार को विश्वविद्यालय संगीत व नाटक विभाग में। यहां के छात्रों ने समाज से प्लास्टिक का चलन पूरी तरह प्रतिबंधित करने का संदेश देते प्लास्टिक की थैली का मंचन किया वहीं, कफन के माध्यम से सामाजिक परिवेश का ऐसा ताना-बाना बुना कि दर्शकों के साथ पूरा मौजूद परिवेश ही तालियों से उसका स्वागत किए बगैर नहीं रह सका।

जानकारी के अनुसार, अभिनय के एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स के अंतिम प्रायोगिक परीक्षा के अंतर्गत एमआर एम कॉलेज में प्लास्टिक की थैली नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया। सर्टिफिकेट कोर्स का यह प्रथम बैच है। इसके तहत 2017-18 सत्र के छात्रों ने आज परीक्षा में हिस्सा लिया। दूसरे सत्र में प्रेमचंद की कथा कफन का मंचन किया गया। दोनों ही नाटकों को दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं, परीक्षक ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। बारह छात्रों ने मिलकर पूरे नाटक को सजाया। मंचन के दौरान कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. पुष्पम् नारायण,विभागाध्यक्ष लावण्य कीर्ति सिंह काव्या, बाह्य परीक्षक अखिलेश कुमार जयसवाल व सागर सिंह के साथ ही विभाग के सभी शिक्षक व छात्र मौजूद थे।









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