सीतामढ़ी, खबरयुग। ये चुनाव आयोग का कैसा डंडा पड़ा। पिछले चुनाव में प्रत्याशी थे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। इतना ही नहीं तीन साल तक कोई चुनाव लड़ ही नहीं सकते यानी मतलब साफ, लोकसभा तो गया ही विधानसभा भी हाथ से निकला। ऐसे एक दो नहीं बल्कि बारह नेता हैं जिनपर चुनाव आयोग का चाबुक पड़ा है। जिले के बारह नेताओं के चुनाव लड़ने पर तीन साल के लिए रोक लगा दी गई है। कारण यह बताया गया कि आप बड़े सुस्त हैं। पूर्व के चुनाव में किए गए खर्च का ब्यौरा अभी तक आपने नहीं सौंपा। इससे नाराज आयोग ने निर्वाचन अधिनियम की धारा दस ए के तहत कार्रवाई की है। आयोग ने अयोग्य लोगों के नामों की सूची डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी को भी भेज दी है। वहीं प्रत्याशियों के नाम की सूची चुनाव आयोग के वेबसाइट पर जारी कर दी है। अहम व दुखद यह कि सभी वंचित लोग पिछले विधान सभा चुनाव में मैदान में उतरे थे।
कौन-कौन हैं जद में
इसके तहत सीतामढ़ी विधानसभा क्षेत्र के जानकी स्थान वार्ड छह के शफी के पुत्र इरशाद अहमद। इनपर आठ अगस्त 2017 के प्रभाव से चुनाव लड़ने पर रोक लगी है। यह रोक बीस अगस्त 2020 तक लगी रहेगी। बाजपट्टी विधान सभा क्षेत्र रसलपुर की रेखा देवी। इसी गांव की एक अन्य रेखा देवी वहीं कोइली नानपुर के आश नारायण झा, बसहा के अवधेश कुमार, सुरसंड विधान सभा क्षेत्र के रीगा भवदेपुर के मुकेश कुमार सिंह, रीगा विधान सभा क्षेत्र पोसुआ पटनिया के अब्बास शेख मेजरगंज भरवाड़ा के गोनौर दास पर आठ अगस्त 2020 तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है। बेलसंड विधान सभा तरियानी छपरा के अखिलेश कुमार सिंह, इसी गांव के संजय सिंह, रुपौली निवासी नूर आलम और खुशनंदन राम पर आयोग ने 11 सितंबर 2017 के प्रभाव से अगले तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। यह रोक 11 सितंबर 2020 तक लगी रहेगी।








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