Bihar Cooperative Policy: बिहार सरकार ने प्रदेश के सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने नई परियोजनाओं और बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इस पहल के तहत मधुबनी के सकरी में नई सहकारी चीनी मिल और दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स स्थापित किए जाएंगे, जिससे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

सहकारिता से बदलेगी बिहार के किसानों की तकदीर
राज्य सरकार ने बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 को लागू किया है, जिसके माध्यम से सहकारी समितियों को तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़कर खेती से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देना है। सरकार ने रोजगार के नए अवसर पैदा करने और किसानों की उपज की खरीद पर विशेष जोर दिया है, जिसमें धान अधिप्राप्ति की व्यवस्था को सहकारी ढांचे से मजबूत करने का प्रयास शामिल है।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सब्जी उत्पादन और उसके प्रसंस्करण को भी सहकारिता से जोड़ने की तैयारी है, जिससे किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने के बजाय मूल्यवर्धन की गतिविधियों से जुड़ने का मौका मिलेगा।
पैक्स बनेंगे ग्रामीण सेवाओं के केंद्र
सहकारिता विभाग के अनुसार, पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) को अब केवल कृषि ऋण और खरीद की व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इन्हें ग्रामीण स्तर पर विभिन्न प्रकार की सेवाओं का केंद्र बनाने की योजना है। इसके तहत पैक्सों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), जन औषधि केंद्र और प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस बदलाव का उद्देश्य गांवों में सरकारी और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है, जिससे ग्रामीण आबादी को कई जरूरी सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और सेवा वितरण को मजबूत करने में सहायक होगी।
बकरी पालन और मखाना उत्पादन को भी मिला बढ़ावा
सहकारिता क्षेत्र में पशुपालन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 481 प्रखंडों में बकरी पालक सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। इन समितियों के माध्यम से बकरी पालन से जुड़े लोगों को संगठित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि उन्हें बेहतर बाजार और सुविधाएं मिल सकें।
इसी तरह, बिहार में मखाना उत्पादन को भी सहकारी ढांचे से जोड़ने की पहल की गई है। राज्य में अब तक 67 मखाना सहकारी समितियां पंजीकृत की जा चुकी हैं। इन समितियों का उद्देश्य मखाना उत्पादकों को संगठित बाजार, प्रसंस्करण और कारोबार से जोड़ना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
ये सभी कदम बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। नई सहकारिता नीति और परियोजनाओं से प्रदेश के कृषि और पशुपालन क्षेत्रों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पढ़िए विस्तार से
सहकारिता विभाग तथा डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के बीच जिला एवं प्रमंडल स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ और राज्यस्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ के गठन पर बनी सहमति
मत्स्यजीवी सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग के मंत्री श्री राम कृपाल यादव तथा डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री श्री नन्दकिशोर राम की अध्यक्षता में मत्स्यपालक समूह के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गयी। बैठक में मत्स्यजीवियों के लिए सहकारी संघ एवं परिसंघ के गठन पर सार्थक चर्चा की गयी। विदित है कि वर्तमान में प्रखंड स्तर पर प्राथमिक मत्स्यजीवी सहकारी समितियां पहले से गठित हैं, लेकिन इनसे जुड़ी संबद्ध समितियां नहीं हैं।
बैठक में दोनों विभागों के बीच सहमति बनने के बाद सहकारिता विभाग द्वारा राज्य मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अनुसार प्रखंड स्तर की प्राथमिक मत्स्यजीवी सहकारी समितियों को सदस्य के रूप में शामिल करते हुए जिला एवं प्रमंडल स्तर पर मत्स्यजीवी सहकारी संघों का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही सभी मत्स्यजीवी सहकारी संघों को राज्य स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ से जोड़ा जाएगा। संघ एवं परिसंघ के गठन से राज्य की सहकारी मत्स्यजीवी संरचना, कार्य प्रणाली, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि संसाधनों के विकास और प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, समितियों को उन्नत इनपुट ससमय उपलब्ध होगा एवं मार्केटिंग तथा प्रोसेसिंग की व्यवस्था मजबूत की जा सकेगी।
मत्स्यजीवी सहकारी संघ एवं परिसंघ का मुख्य उद्देश्य मत्स्यपालन एवं इससे जुड़ी गतिविधियों तथा अन्य जलीय उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है। संघ एवं परिसंघ सहकारिता के आधार पर उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु स्वयं अथवा सदस्य प्राथमिक समितियों/संघों के सहयोग से संवर्द्धन का कार्य करेगी। इनके द्वारा मत्स्य पालन हेतु उच्च गुणवत्ता के इनपुट, मत्स्य बीज, मत्स्य आहार, दवा इत्यादि की भी व्यवस्था की जायेगी।
बैठक में दोनों विभागों के मंत्रियों सहित सहकारिता विभाग के सचिव श्री धर्मेन्द्र सिंह, डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव श्री शीर्षत कपिल अशोक, निदेशक (मत्स्य) श्री तुषार सिंगला तथा मत्स्यजीवी समूहों के प्रतिनिधि शामिल रहे।









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