Bihar Panchayat Election: बिहार में इस साल पंचायत चुनाव होने की संभावना अब कम दिख रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों के लिए परिसीमन की तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन इसमें लगने वाला लंबा समय चुनाव को 2027 तक खींच सकता है। मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है, ऐसे में नई व्यवस्था के लिए एक साल से अधिक का वक्त लग सकता है।
पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों और वार्डों की सीमाएं तय करने में ही लगभग 6 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद आरक्षण तय करने, नई वोटर लिस्ट बनाने और मतदान केंद्र निर्धारित करने में भी करीब 6 महीने और लगेंगे। इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने में कुल मिलाकर एक साल का समय लग सकता है, जिससे अब पंचायत चुनाव 2027 में होने की प्रबल संभावना बन रही है।
परिसीमन में ही लग जाएंगे 6 महीने से ज्यादा
बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों के तहत पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम पंचायतों का परिसीमन है। इस प्रक्रिया में पंचायतों और चुनाव वाले क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से निर्धारित की जाती हैं। इसके लिए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग पहले आवश्यक गाइडलाइन तैयार करेगा। इन्हीं दिशानिर्देशों के आधार पर सभी जिलों में जिला निर्वाचन पदाधिकारी यानी डीएम की देखरेख में परिसीमन का काम होगा। राज्य निर्वाचन आयोग में इसे लेकर बैठकें भी शुरू हो गई हैं। बिहार में तीन स्तरों वाले पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से ज्यादा का समय लगने का अनुमान है।
पंचायतों का नया नक्शा 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर तैयार किया जाएगा। आयोग गांवों की आबादी और इलाके की भौगोलिक स्थिति का गहन विश्लेषण करेगा। इसी आधार पर ग्राम पंचायत क्षेत्र, प्रादेशिक चुनाव क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद के क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाएंगी। यह पूरा काम बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के नियमों के तहत ही संपन्न होगा।
एक साल तक खिंच सकती हैं चुनाव की बाकी तैयारियां
पंचायतों की नई सीमाएं तय होने के बाद भी चुनाव की तैयारियां पूरी नहीं होंगी। इसके बाद विभिन्न पदों के लिए आरक्षण तय किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के लिए सीटों का अनुपात निर्धारित होगा। इसका सीधा मतलब है कि परिसीमन के बाद कई पंचायतों में आरक्षित और सामान्य सीटों की स्थिति में बदलाव आ सकता है, जिससे संभावित उम्मीदवारों को नए आरक्षण रोस्टर का इंतजार करना होगा।
इसके अतिरिक्त, नई वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी और मतदान केंद्र भी निर्धारित किए जाएंगे। इन सभी कामों को पूरा करने में लगभग 6 महीने और लग सकते हैं। इस तरह, परिसीमन से लेकर चुनाव की बाकी सभी तैयारियों तक में करीब एक साल का समय लगने की संभावना है। यही वजह है कि बिहार में पंचायत चुनाव 2026 में होने की संभावना कम मानी जा रही है, और मौजूदा प्रक्रिया को देखते हुए अब अगले पंचायत चुनाव 2027 में होने के आसार ज्यादा हैं।
आपत्ति और सुझावों के बाद ही अंतिम रूप
परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले, इसकी जानकारी सरकारी गजट में प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद आम लोगों को अपनी आपत्ति और सुझाव देने का मौका मिलेगा। यदि किसी व्यक्ति या क्षेत्र को नई सीमा को लेकर कोई परेशानी या आपत्ति होगी, तो वह अपनी बात रख सकेगा। मिली हुई आपत्तियों और सुझावों की जांच के बाद आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, और उसके बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पंचायतों की नई सीमाएं तय करने में जिलाधिकारियों की भी अहम भूमिका होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश और निगरानी में सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी नए पंचायत क्षेत्रों की सीमा तय कराने का काम पूरा कराएंगे। आयोग पूरे राज्य के लिए नियम और दिशा-निर्देश तय करेगा, जबकि जिलों में उसके आधार पर परिसीमन का कार्य किया जाएगा।
बिहार में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। पिछली बार पंचायत चुनाव 2021 में सितंबर से दिसंबर के बीच हुए थे, जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद समेत पंचायतों के अलग-अलग पदों के लिए मतदान हुआ था। लेकिन इस बार परिसीमन और अन्य तैयारियों में लगने वाले समय को देखते हुए, अगले पंचायत चुनाव 2027 में ही होने की संभावना बन रही है।







