Bhagalpur School Toilet: बिहार के भागलपुर जिले में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के दावों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। कहलगांव प्रखंड की एकचारी पंचायत स्थित मध्य विद्यालय रसलपुर में करीब 350 बच्चे शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि तीन शौचालय पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि बचा हुआ एक शौचालय भी असुरक्षित है। मजबूरन लड़कों को सड़क पार कर खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
रसलपुर के 350 बच्चे क्यों हैं जान जोखिम में?
मध्य विद्यालय रसलपुर में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं। विद्यालय में पहले चार शौचालय बने थे, लेकिन चारदीवारी न होने के कारण असामाजिक तत्वों और स्थानीय लोगों ने उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। अब पूरा स्कूल सिर्फ एक असुरक्षित शौचालय के भरोसे चल रहा है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से छात्राएं और महिला शिक्षिकाएं करती हैं।






विद्यालय के शिक्षक भागीरथ पंडित ने बताया, ‘लड़कों के लिए शौचालय नहीं होने के कारण वे खुले में जाने को मजबूर हैं। कई छात्र शौचालय जाने के बहाने घर चले जाते हैं और देर तक वापस नहीं लौटते। कई बार सड़क पार करते समय बच्चे दुर्घटनाओं का शिकार भी हो चुके हैं। यदि विद्यालय में चारदीवारी होती तो सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहती और यह स्थिति पैदा नहीं होती।’
यह स्थिति बच्चों की उपस्थिति और सुरक्षा दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। कई बच्चे शौचालय के बहाने स्कूल से नदारद हो जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
छात्राओं की सुरक्षा और जर्जर व्यवस्था
शौचालय की कमी सिर्फ लड़कों के लिए ही नहीं, बल्कि छात्राओं के लिए भी एक बड़ी चिंता का विषय है। आठवीं की छात्रा आयुषी कुमारी ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि स्कूल में बच्चों की संख्या अधिक है, लेकिन उपयोग योग्य शौचालय लगभग नहीं के बराबर है।
आयुषी कुमारी ने कहा, ‘जो शौचालय है, वहां पानी की भी समस्या है और वह विद्यालय के पिछले हिस्से में स्थित है, जहां से खेत शुरू हो जाते हैं। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है।’
वहीं, आठवीं के छात्र प्रखर कुमार ने बताया कि जब वह पांचवीं कक्षा में थे, तभी से स्कूल में शौचालय की समस्या बनी हुई है और अब आठवीं में पहुंचने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं। उन्हें मजबूरन सड़क पार कर खुले में जाना पड़ता है, जहां हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। शौचालय के अलावा, विद्यालय का एक भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। मुख्य गेट के बाहर कचरे का अंबार लगा रहता है और आसपास अतिक्रमण भी हो गया है। चारदीवारी नहीं होने के कारण स्कूल में कई बार चोरी की घटनाएं भी हो चुकी हैं, और शाम होते ही असामाजिक तत्व परिसर में घुसकर नशा करते हैं, जिससे विद्यालय का वातावरण खराब हो रहा है।
कागजों पर समाधान, जमीनी हकीकत बदहाल
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजीत कुमार ने बताया कि स्कूल में पहले शौचालय थे, लेकिन चारदीवारी नहीं होने के कारण उन्हें पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पिछले तीन वर्षों से विद्यालय शौचालय विहीन जैसी स्थिति में है। इस संबंध में कई बार विभाग को लिखित जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस गंभीर समस्या पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अजीत कुमार ने कहा, ‘यह मामला आपके माध्यम से हमारे संज्ञान में आया है। विद्यालय की ओर से अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली थी। हम पूरे मामले की जांच कराएंगे और जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।’
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस गंभीर समस्या को कई बार विद्यालय शिक्षा समिति (वीईसी) और बीआरसी की बैठकों में उठाया गया तथा संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन भी दिया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। यह स्थिति सरकारी स्कूलों में स्वच्छता, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावों पर सवालिया निशान लगाती है। रसलपुर मध्य विद्यालय के बच्चों को कब तक अपनी जान जोखिम में डालकर खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ेगा, यह एक गंभीर प्रश्न है जिसका जवाब प्रशासन को जल्द देना होगा।








