Bihar Makhana Papad: बिहार की थाली में अब जल्द ही एक नया और पौष्टिक व्यंजन जुड़ने वाला है – बिहार का मखाना पापड़। मिथिलांचल और सीमांचल की महिलाओं व युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह अनोखा उत्पाद तैयार किया गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के मार्गदर्शन में 100% शुद्ध मखाना से बने इस पापड़ से न केवल लोगों को नया स्वाद मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मखाना पापड़: शुद्धता और स्वाद का संगम
बीएयू सबौर के डायरेक्टर रिसर्च डॉ अनिल के सिंह ने बताया कि मखाना पापड़ हर थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। इसे पूरी तरह से शुद्ध मखाना से तैयार किया गया है, जिसमें मखाना के हर आकार के दानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह उत्पाद मखाना की पौष्टिकता को बरकरार रखते हुए उसे एक नए रूप में पेश करता है, जिससे उपभोक्ता इसे आसानी से अपने भोजन में शामिल कर सकेंगे।






वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा मखाना उद्योग
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मखाने की बढ़ती मांग को देखते हुए, मखाना पापड़ का यह उद्योग भविष्य में वैश्विक पहचान बनाने की क्षमता रखता है। बीएयू के ‘सब एग्रिस’ स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत युवाओं और महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे मखाना प्रसंस्करण के इस नए क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि मखाना उत्पादकों के लिए भी नए रास्ते खोलेगी।
मखाना पापड़ का यह नवाचार बिहार के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में धूम मचाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार के मखाना उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित होगी।







