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बिजली संकट खत्म! बिहार में बांका, नवादा, सीवान में लगेंगे 2×700 मेगावाट की 4 परमाणु संयंत्र, 12 महीने की डेडलाइन, दो सशर्त जल स्वीकृति

Bihar Nuclear Power: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में बांका, नवादा और सीवान जिलों में प्रस्तावित चार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी।

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Bihar Nuclear Power: राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में प्रस्तावित 2×700 मेगावाट क्षमता वाली चार प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान सभी संबंधित विभागों को अगले 12 महीनों के भीतर प्रमुख नियामक प्रक्रियाओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

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इन प्रस्तावित परियोजनाओं में बांका जिले के भितिया और शंभूगंज, नवादा जिले के रजौली और सीवान जिले के दरौली में स्थापित होने वाले संयंत्र शामिल हैं। सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं बिहार की विश्वसनीय बेस-लोड बिजली उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और नेट-ज़ीरो उद्देश्यों में भी योगदान देंगी।

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परमाणु परियोजनाओं के लिए भूमि और जल की आवश्यकताएँ

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रत्येक 2×700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा संयंत्र को अपने शीतलन प्रणाली के लिए सालाना लगभग 80 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी की आवश्यकता होगी। इसमें से, परिचालन के दौरान लगभग 58 MCM पानी की खपत होगी, जबकि शेष लगभग 22 MCM विकिरण-मुक्त पानी को उपचारित, पुनर्चक्रित और सिंचाई तथा अन्य उपयुक्त उद्देश्यों के लिए स्रोत में वापस छोड़ दिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रत्येक परियोजना के लिए लगभग 1,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।

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प्रगति की समीक्षा और सामने आईं चुनौतियाँ

समीक्षा के दौरान, अधिकारियों ने बताया कि बांका के भितिया में प्रस्तावित स्थल के लिए जल संसाधन विभाग ने बड़ुआ जलाशय से सालाना 80 MCM पानी की आपूर्ति के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पहले ही जारी कर दिया है। वन विभाग ने भी आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान कर दी हैं। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को परियोजना के कार्यान्वयन को प्रभावित करने वाले स्थानीय मुद्दों को हल करने और प्रशासनिक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

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नवादा के रजौली में प्रस्तावित स्थल के लिए, नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के प्रतिनिधियों ने बैठक को सूचित किया कि यह स्थान पास की एक बड़ी फॉल्ट लाइन के कारण अनुपयुक्त पाया गया है। यह फॉल्ट लाइन परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा निर्धारित भूकंपीय सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती है।

दो स्थलों के लिए सशर्त जल स्वीकृति का निर्देश

बैठक में सीवान के दरौली और बांका के शंभूगंज में न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के प्रस्तावित परियोजना स्थलों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इन दोनों स्थानों के लिए सालाना 80 MCM पानी की उपलब्धता के संबंध में जल संसाधन विभाग से सशर्त अनापत्ति प्रमाण पत्र या आश्वासन प्राप्त करने का निर्देश दिया। इस कदम का उद्देश्य अंतिम वैधानिक स्वीकृतियों की प्रतीक्षा किए बिना भू-तकनीकी जांच और प्रारंभिक स्थल अध्ययन शुरू करने की अनुमति देना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सशर्त आश्वासन अंतिम जल आवंटन और अन्य नियामक स्वीकृतियों के अधीन रहेगा।

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विभागों को मिशन मोड में काम करने का निर्देश

प्रत्यय अमृत ने सभी संबंधित विभागों को अगले 12 महीनों के भीतर नियामक प्रक्रियाओं को पूरा करने का निर्देश दिया, जिसमें बोरहोल ड्रिलिंग के लिए अनुमतियां, सैद्धांतिक भूमि आश्वासन और जल आवंटन प्रक्रियाएं शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इन प्रक्रियाओं के समय पर पूरा होने से प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी शीघ्र प्राप्त करने में सुविधा होगी। बैठक में ऊर्जा विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व और भूमि सुधार विभाग, और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ NTPC और NPCIL के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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