Benipur Mid-Day Meal: बेनीपुर के प्रखंड क्षेत्र स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय माधोपुर में बच्चों के मिड-डे मील में छिपकली मिलने की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर लापरवाही के बाद दर्जनों बच्चे बीमार पड़ गए, जिन्हें तत्काल अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) मनीष कुमार झा ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और तत्काल प्रभाव से एक त्रिसदस्यीय जांच समिति का गठन करते हुए 24 घंटे के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश दिया है।
माधोपुर स्कूल में छिपकली मिलने से बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती
बुधवार को उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय माधोपुर में बच्चों को मध्यान भोजन परोसा गया था। खाना खाते ही बच्चों ने भोजन में छिपकली होने की शिकायत की, जिसके बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आनन-फानन में बीमार बच्चों को अनुमंडल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें समुचित इलाज दिया गया। इलाज के बाद सभी बच्चों को उनके घर भेज दिया गया, लेकिन इस घटना ने भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






एकता फाउंडेशन की लापरवाही पर SDO का कड़ा रुख
बच्चों को मध्यान भोजन आपूर्ति करने वाली संस्था ‘एकता फाउंडेशन’ पर लगातार लापरवाही और अनियमितता बरतने का आरोप लगता रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब इस संस्था के भोजन में गड़बड़ी पाई गई है। वर्ष 2024 में नगर परिषद क्षेत्र के करहरी प्राथमिक विद्यालय में भी एकता फाउंडेशन द्वारा सड़े हुए अंडे परोसने का मामला सामने आया था। उस समय प्रधानाध्यापक ने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से की थी, लेकिन उल्टे प्रधानाध्यापक के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई थी। इस कारण अन्य प्रधानाध्यापक एकता फाउंडेशन की मनमानी को चुपचाप सहने पर मजबूर थे।
अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार झा ने इस बार मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक्शन लिया है। उन्होंने भूमि सुधार उपसमाहर्ता अविनाश कुमार सिंह, सहायक निर्वाचन पदाधिकारी सुदीप शंकर झा और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रूपेश राय को नामित करते हुए एक जांच कमेटी बनाई है। इस कमेटी को 24 घंटे के भीतर पूरी घटना की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना ने मध्यान भोजन योजना के तहत मिलने वाले भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता पर चिंता बढ़ा दी है। अनुमंडल पदाधिकारी के इस कड़े रुख से उम्मीद है कि बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर उचित कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रुकेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।








